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Thursday, April 16, 2026
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केंद्र ने धोलेरा में पहले चिप प्लांट के लिए एसईजेड मंजूरी दी

सरकार पहले भी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एसईजेड कानून में कई बड़े सुधार कर चुकी है।

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केंद्र सरकार ने गुजरात के धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर (आईटी/आईटीईएस सहित) के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।

यह एसईजेड करीब 66.166 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा और इससे लगभग 21,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। यह परियोजना इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और आईटी-आधारित सेवाओं को समर्थन देने के लिए तैयार की गई है, जिसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन व लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने के लिए विशेष अनुमति प्रणाली भी शामिल होगी। मंत्रालय के अनुसार, यह भारत का पहला चिप निर्माण (फैब्रिकेशन) प्लांट होगा।

सरकार पहले भी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एसईजेड कानून में कई बड़े सुधार कर चुकी है। इन सुधारों का उद्देश्य उच्च निवेश को आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना और कारोबार करने में आसानी को बढ़ाना है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर हब बन सके।

3 जून 2025 को जारी अधिसूचना के जरिए एसईजेड नियम, 2006 में अहम बदलाव किए गए। इसके तहत न्यूनतम जमीन की आवश्यकता 50 हेक्टेयर से घटाकर 10 हेक्टेयर कर दी गई। इसके अलावा, जमीन से जुड़े नियमों में लचीलापन, मुफ्त सप्लाई को नेट फॉरेन एक्सचेंज में शामिल करना, और घरेलू बाजार (डीटीए) में बिक्री की अनुमति जैसे कदम भी उठाए गए।

इन सुधारों के बाद एसईजेड बोर्ड ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग प्लांट शामिल है, जिसमें लगभग 13,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। वहीं, एक्वस समूह कर्नाटक के धारवाड़ में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसईजेड स्थापित कर रहा है।

इसके अलावा सीजी सेमी, कायन्स सेमीकॉन और हुबली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है, जो देश में सप्लाई चेन मजबूत करने, रोजगार बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।

इन सभी विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) से भारत में एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने की परिकल्पना की गई है। बयान में कहा गया है कि इंडस्ट्री की भागीदारी और नीतिगत समर्थन के साथ ये कदम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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