ईडी की तरफ से इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने और संपत्तियों को अटैच किए जाने की खबरों के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि केंद्र रॉबर्ट वाड्रा को परेशान कर रहा है। राहुल ने कहा कि अंत में जीत सच्चाई की होगी।
आरोप है कि मानेसर-शिकोहपुर में मौजूद जमीन के ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से वाड्रा की कंपनी को बेचे जाने के एक दिन बाद ही इसका म्यूटेशन कर दिया गया। इतना ही नहीं, इसके अगले दिन जमीन को वाड्रा की कंपनी को स्थानांतरित भी कर दिया गया। जबकि आमतौर पर इस प्रक्रिया में तीन महीने का समय लगता है।
आवासीय परियोजना का लाइसेंस मिलने के बाद जमीन की कीमत बढ़ गई। जून 2008 में वाड्रा से जुड़ी कंपनी ने ये जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ में बेच दी। यानी कुछ ही महीनों जमीन की कीमत 773 प्रतिशत तक बढ़ गई। आगे चलकर हुड्डा सरकार ने आवासीय परियोजना का लाइसेंस डीएलएफ को ट्रांसफर कर दिया।
इसके ठीक बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के आदेश पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया। हालांकि, खेमका ने अपनी जांच पूरी कर ली और 15 अक्तूबर को जमीन का म्यूटेशन रद्द कर दिया।
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