ताइवान में चीन की जासूसी और साइबर हमले तैयारी, एनएसबी अलर्ट जारी

ताइवान के प्रमुख अखबार ताइपे टाइम्स के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि सीसीपी विभिन्न नेटवर्क के जरिए आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से संभावित लोगों की पहचान करती है।  

ताइवान में चीन की जासूसी और साइबर हमले तैयारी, एनएसबी अलर्ट जारी

China-Prepares-for-Espionage-and-Cyberattacks-in-Taiwan-NSB-Issues-Alert

ताइवान के नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो (एनएसबी) के महानिदेशक त्साई मिंग-येन ने कहा है कि चीन द्वारा ताइवान में घुसपैठ की कोशिशें संगठित, योजनाबद्ध और लक्षित हैं। चीन की पहले मध्यम स्तर के सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाता था, लेकिन अब उसका ध्यान निचले स्तर के सैनिकों (रैंक-एंड-फाइल) की भर्ती पर केंद्रित हो गया है।

बुधवार को संसद की विदेश मामलों और राष्ट्रीय रक्षा समिति की बैठक में बोलते हुए त्साई मिंग-येन ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ताइवान में खुफिया जानकारी जुटाने और जासूसी गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा, इंटेलिजेंस ऑपरेशंस और यूनाइटेड फ्रंट रणनीति का इस्तेमाल कर रही है।

ताइवान के प्रमुख अखबार ताइपे टाइम्स के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि सीसीपी विभिन्न नेटवर्क के जरिए आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से संभावित लोगों की पहचान करती है और स्थानीय सहयोगियों को जोड़कर खुफिया तंत्र खड़ा करती है।

त्साई ने यह भी बताया कि चीन अब अपने निशाने बदल रहा है। पहले वह मिड-लेवल सैन्य अधिकारियों को टारगेट करता था, जिनके पास संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच आसान होती थी, लेकिन अब वह नॉन-कमीशंड अधिकारियों और सामान्य सैनिकों को निशाना बना रहा है।

इस बीच, नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन नवंबर में होने वाले ताइवान के ‘नाइन-इन-वन’ स्थानीय चुनावों में दखल देने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत ताइवान के गवर्नमेंट सर्विस नेटवर्क पर साइबर हमले किए जा सकते हैं।

इस बीच, नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो (एनएसबी) की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट से पता चला है कि चीन ताइवान के ‘नाइन-इन-वन’ लोकल चुनावों में दखल देने के लिए तैयार है। नाइन-इन-वन चुनाव नवंबर में होने वाले हैं। इसके लिए वह ताइवानी गवर्नमेंट सर्विस नेटवर्क (जीएसएन) पर हमले करेगा।

यह रिपोर्ट पिछले हफ्ते विदेश मामलों और राष्ट्रीय रक्षा कमेटी में ब्यूरो की तय ब्रीफिंग से पहले लेजिस्लेटिव युआन को सौंपी गई थी। ताइवान के खिलाफ चीन के कॉग्निटिव वॉरफेयर के बारे में डिटेल्स बताते हुए ब्यूरो ने कहा कि नेशनल सिक्योरिटी टीम को लगभग 13,000 संदिग्ध इंटरनेट अकाउंट और 860,000 विवादित मैसेज मिले हैं।

ब्यूरो ने कहा कि विवादित मैसेज बड़े विदेशी मामलों, राष्ट्रीय रक्षा और आर्थिक मुद्दों पर फोकस करते हैं, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके बनाया गया था और चीनी सरकारी मीडिया, इंटरनेट ट्रोल, संदिग्ध अकाउंट और कंटेंट फार्म के जरिए शेयर किया गया था।

ब्यूरो ने कहा कि 2026 की पहली तिमाही के दौरान जीएसए पर 173.28 मिलियन से ज्यादा बार हमला हुआ। ये हरकतें ‘नाइन-इन-वन’ चुनावों में चीनी दखल का हिस्सा हो सकती हैं। ये इंटेलिजेंस इकट्ठा करने, निगरानी करने और डेटा चोरी के मकसद से बनाए गए थे।

ब्यूरो ने कहा, “इस साल के आखिर में होने वाले चुनावों के लिए, चीन के हाइब्रिड तरीका अपनाकर दखल देने की उम्मीद है, जिसमें एआई-पावर्ड डीप-फेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके विवादित कंटेंट फैलाना, झूठे पब्लिक ओपिनियन सर्वे पब्लिश करना और गैर-कानूनी बेटिंग रिंग बनाना शामिल है।”

इसमें बताया गया है कि बीजिंग शायद टूरिस्टों को चीन बुलाकर, उनके आने-जाने का खर्च उठाकर और चीन के समर्थन वाले शहरों या काउंटियों से खेती के उत्पाद खरीदकर चुनाव के नतीजों को बदलने की कोशिश करेगा।

ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में चीनी मिलिट्री एयरक्राफ्ट ने ताइवान के एयरस्पेस में 420 से ज्यादा बार एंट्री की। ब्यूरो ने कहा कि इन एक्शन को चीनी नेवी के जहाजों के साथ कोऑर्डिनेट करके 10 “जॉइंट कॉम्बैट रेडीनेस पेट्रोल” किए गए और इसका मकसद समय-समय पर ड्रिल के जरिए ताइवान के खिलाफ ऑपरेशनल क्षमता को टेस्ट करना था।

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