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चिराग पासवान का बड़ा यू-टर्न! बिहार चुनाव 2025 को लेकर किया बड़ा दावा!

चिराग पासवान ने कहा कि कार्यकर्ताओं की चाहत चाहे जो हो, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर सहमति पूरे गठबंधन की होनी चाहिए।

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीति में नई हलचल मच गई है। एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर चल रही खींचातानी के बीच लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बड़ा यू-टर्न लिया है।   
 
उन्होंने साफ कहा कि आगामी चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और वही एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। चिराग ने स्पष्ट किया कि वह खुद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं और एनडीए इस बार 225 से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाएगा। 
 
चिराग पासवान ने कहा कि कार्यकर्ताओं की चाहत चाहे जो हो, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर सहमति पूरे गठबंधन की होनी चाहिए। उन्होंने सीट बंटवारे को लेकर कहा कि संख्या से ज्यादा उन्हें क्वालिटी वाली सीटें चाहिए, ताकि जीत का प्रतिशत बेहतर हो। 
 
उन्होंने अपने बयान में महागठबंधन पर भी निशाना साधा और कहा कि वहाँ अंदरूनी मतभेद चुनाव के दौरान और बढ़ेंगे। उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें एनडीए की बजाय अपनी राजनीति की चिंता करनी चाहिए। 
 
यह बयान ऐसे समय में आया है जब एनडीए में सीटों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी ने 15 से 20 सीटें मांगते हुए चेताया है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे 100 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं, चिराग पासवान के जीजा और जमुई सांसद अरुण भारती ने 43 से 137 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग करते हुए चिराग को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने का समर्थन किया था। 
 
हालांकि चिराग ने इन दावों से खुद को अलग करते हुए नीतीश कुमार को ही नेतृत्व का चेहरा बताया। महागठबंधन में भी स्थिति आसान नहीं है। कांग्रेस ने 70 सीटों की मांग की है, वीआईपी उपमुख्यमंत्री पद के साथ 50 सीटें चाहती है, जबकि जेएमएम सीमांचल और संथाल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। तेजस्वी यादव को सीएम फेस बनाने पर भी अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। अंदरूनी खटपट की चर्चा तेज है और सीट बंटवारे का फॉर्मूला अभी अधूरा है। 
 
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चिराग का यह बयान एनडीए में अंदरूनी तनाव कम करने और चुनावी रणनीति को साफ-सुथरा दिखाने की कोशिश है। सीटों की गुणवत्ता पर ज़ोर देकर वह गठबंधन के बीच अपनी भूमिका मजबूत करना चाहते हैं। वहीं, महागठबंधन में बढ़ती मतभेद की खबरों ने बिहार की सियासत को और दिलचस्प बना दिया है।

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