भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. गवई ने शुक्रवार(24 अगस्त) को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज सुरेश्वर ठाकुर के कामकाज पर गंभीर टिप्पणी की। सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को उनके दिए फैसलों को समझने में बेहद कठिनाई होती थी और सौभाग्य से वह अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट तीन आरोपियों की अपील सुन रहा था। आरोपियों को अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट की एक बेंच ने दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट ने पहले उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन जस्टिस ठाकुर की बेंच ने फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील सिद्धार्थ डेव और शिकायतकर्ता पक्ष के वकील नरेंद्र हुड्डा ने भी स्वीकार किया कि जस्टिस ठाकुर का फैसला समझना बेहद कठिन था। जब सीजेआई गवई ने सुझाव दिया कि मामले को दोबारा हाईकोर्ट को सुनवाई के लिए भेजा जाए, तो दोनों वकीलों ने सहमति जताई। इसी दौरान हुड्डा ने टिप्पणी की कि ठाकुर के कई फैसले सुप्रीम कोर्ट ने पलटे हैं। इस पर सीजेआई ने स्पष्ट किया, “यह सिर्फ कई नहीं हैं। उनके हर फैसले, जो सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए गए, पलट दिए गए। सौभाग्य से वे अब पद छोड़ चुके हैं।”
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ठाकुर के 1 अक्टूबर वाले फैसले का एक अंश भी पढ़कर सुनाया, जिसमें जटिल और उलझे हुए शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। बेंच ने कहा कि इस तरह की गूढ़ भाषा और असंगत तर्क न्यायिक समीक्षा को और पेचीदा बना देती है।
यह पहली बार नहीं है जब जस्टिस ठाकुर की लिखी गई टिप्पणियां सवालों के घेरे में आई हों। तीन महीने पहले ही उन्होंने नेशनल हाईवेज़ एक्ट की एक धारा को असंवैधानिक ठहराया था। उस समय भी सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और विजय विश्नोई उनके तर्कों को समझने में मुश्किल का सामना कर रही थी।
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