महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को सीपी राधाकृष्णन को भारत का उपराष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी और विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। फडणवीस ने कहा कि विपक्ष माहौल बना रहा था कि एनडीए के वोट बंट जाएंगे, लेकिन नतीजे इसके उलट आए और विपक्ष अपने ही वोट सुरक्षित नहीं रख सका।
फडणवीस ने कहा, “महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति बने हैं। मैं उन्हें बधाई देता हूं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने उन्हें नामित किया और सभी एनडीए सहयोगियों का भी धन्यवाद करता हूं। मुझे विशेष खुशी है कि भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में मुंबई का एक वोटर चुना गया है। विपक्ष माहौल बना रहा था कि एनडीए के वोट बंट जाएंगे, लेकिन हुआ उल्टा—विपक्ष अपने ही वोट बचा नहीं पाया और वे वोट सीपी राधाकृष्णन को मिल गए।”
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिल्ली में राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी। इस दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, प्रह्लाद जोशी और जेपी नड्डा भी मौजूद थे।
152 वोटों से जीत
उपराष्ट्रपति चुनाव में राधाकृष्णन ने विपक्षी INDI गठबंधन के उम्मीदवार और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बी. सुधर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराया। मंगलवार को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक हुए मतदान में 781 में से 767 सांसदों ने वोट डाला।
राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी के अनुसार, “एनडीए उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को 452 प्रथम वरीयता वोट मिले हैं और वे भारत के उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। विपक्ष के उम्मीदवार जस्टिस सुधर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले, जबकि 15 वोट अमान्य पाए गए।”
कुल 13 सांसदों ने मतदान से दूरी बनाई। इनमें सात सांसद बीजद, चार भारत राष्ट्र समिति, एक शिरोमणि अकाली दल और एक निर्दलीय सांसद शामिल रहे। उपराष्ट्रपति का पद 21 जुलाई 2025 से खाली था, जब जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था।
राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर
चंद्रपुरम पोनुस्वामी राधाकृष्णन 31 जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के 24वें राज्यपाल रहे और एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए गए। इससे पहले वे फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक झारखंड के राज्यपाल रहे।
मार्च से जुलाई 2024 के बीच उन्होंने तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला। राधाकृष्णन दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं। उनका जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ था। इस तरह विपक्षी दलों के भीतर संभावित क्रॉस-वोटिंग और एनडीए की मजबूत रणनीति ने राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचा दिया।
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