बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस की करारी हार ने पार्टी के भीतर भारी असंतोष को जन्म दे दिया है। राज्य में पुनरुत्थान की उम्मीद लगाए बैठी कांग्रेस मात्र छह सीटों पर सिमट गई, जिसके बाद वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर संगठनात्मक कमियों, नेतृत्व की चूक और जमीनी हकीकत से कटे हुए फैसलों पर सवाल उठाए हैं। शशि थरूर, निखिल कुमार, कृपानाथ पाठक और मुमताज़ पटेल सहित कई दिग्गज नेताओं के बयानों ने संकेत दे दिया है कि पार्टी के भीतर गहरी बेचैनी और निराशा पनप रही है।
कांग्रेस ने बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन नतीजों ने संगठन की कमजोरी को एक बार फिर उजागर कर दिया। कई नेताओं ने चुनाव आयोग या बाहरी कारणों को जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति पर नाराज़गी जताई और कहा कि वास्तविक समस्या पार्टी के अंदर ही है। नेताओं का कहना है कि यह समय “बहाने” बनाने का नहीं, बल्कि कठोर और ईमानदार आत्ममंथन का है।
शशि थरूर ने कहा कि बिहार में पार्टी की रणनीति, संदेश और संगठनात्मक प्रयासों की गंभीर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्हें चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं बनाया गया, लेकिन उनके अनुसार अनेक सहकर्मियों की बातों से साफ है कि पार्टी ने कई स्तरों पर गलतियाँ कीं। नतीजों के बाद उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट है कि एनडीए की बढ़त बहुत बड़ी है। यह बेहद निराशाजनक है, और अगर यही अंतिम नतीजे हैं, तो पार्टी को न केवल बैठकर सोचने, बल्कि यह भी अध्ययन करने की ज़रूरत है कि रणनीतिक, संदेशात्मक या संगठनात्मक गलतियाँ क्या हुईं।”
#WATCH | Thiruvananthapuram, Kerala: On #BiharElections, Congress MP Shashi Tharoor says, "… it's very clear that the lead is overwhelmingly with the NDA. It's obviously seriously disappointing, and if that turns out to be the final result, then I think there will have to be… pic.twitter.com/10rnFhMEs1
— ANI (@ANI) November 14, 2025
कृपानाथ पाठक ने मीडिया से कहा, “हमारा मानना है कि राज्य में ज़िम्मेदार लोगों ने सही जानकारी नहीं दी और सही लोगों की पहचान नहीं की। चाहे यह चूक रही हो या लापरवाही, इससे बड़ी समस्याएँ पैदा हुईं।”
Patna, Bihar: On the #BiharAssemblyElections, Congress leader Kripananth Pathak says, "We believe that those in the state who were responsible did not convey the correct information. They did not gather accurate details about the right people. Whether it was by mistake or… pic.twitter.com/iGCtAdAiFy
— IANS (@ians_india) November 14, 2025
पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने स्वीकार किया कि पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण उसका जमीनी ढांचा कमजोर होना है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार योग्य थे, लेकिन कुछ जगहों पर बेहतर विकल्प उपलब्ध थे, जिन्हें चुना जाना चाहिए था।
Patna, Bihar: On state Assembly elections, Congress leader and former Governor Nikhil Kumar says, "This reflects the weakness of our organization. In any election, a political party relies on its organizational strength. If the organization is weak and cannot function… pic.twitter.com/s0FMnjTytd
— IANS (@ians_india) November 14, 2025
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने हार स्वीकारते हुए कहा कि पार्टी अपनी कमियों की जांच करेगी। उन्होंने ‘फ्रेंडली फाइट’ को भी कुछ सीटों पर कांग्रेस की हार का कारण बताया। मुमताज़ पटेल ने X पर लिखा, “अब बहाने, अब दोषारोपण, अब औपचारिक आत्ममंथन नहीं। अब भीतर झांकने और सच्चाई स्वीकारने का समय है।”
No excuses ,No blame game No introspection , it’s time to look within and accept reality. Till when will countless loyal ground workers who have stayed with the party through thick and thin …wait to see success … instead it’s failure after failure due to power concentrated in…
— Mumtaz Patel (@mumtazpatels) November 14, 2025
उन्होंने कहा कि जमीनी कार्यकर्ता मेहनत करते रहे, लेकिन निर्णय उन्हीं लोगों के हाथ में रहा जो जमीन की वास्तविकता से दूर हैं। पूर्व मंत्री शकील अहमद ने याद दिलाया कि टिकट वितरण के बाद ही कई नेताओं ने इसकी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे।
बिहार चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि जेडीयू ने 85 सीटें जीतीं। NDA की सभी पार्टियां मिलकर 200 से अधिक सीटों पर कब्जा करते हुए भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटे। इसके मुकाबले कांग्रेस के 60 से अधिक सीटों पर लड़कर केवल छह जीतना उसके लिए गंभीर झटका माना जा रहा है।
हार के बाद कांग्रेस नेताओं के बयान साफ करते है की पार्टी के भीतर कई स्तरों पर असंतोष है। संगठनात्मक कमजोरी, गलत उम्मीदवार चयन, जमीनी स्तर से कटे फैसले, और कार्यकर्ताओं की अनसुनी है। वरिष्ठ नेता अब यह कह रहे हैं कि पार्टी को वास्तविक सुधारों की जरूरत है, वरना उसके राजनीतिक भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग सकता है।
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