ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव और विधायक परगट सिंह ने गुरु नानक देव जी के आगामी प्रकाश पर्व पर पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब गुरुद्वारा जाने के लिए सिख जत्थे को अनुमति न दिए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
परगट सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सिख श्रद्धालुओं के साथ नाइंसाफी कर रही है। उन्होंने कहा,“ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जरूर है, यह संवेदनशील मामला है। लेकिन इसका समाधान निकाला जा सकता है। सिख श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित करना उचित नहीं है। भारत सरकार उनके लिए पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था करने में सक्षम है।”
कांग्रेस विधायक ने कहा कि आज़ादी के बाद यह पहला अवसर है जब गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के मौके पर सिख श्रद्धालुओं को ननकाना साहिब जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने मांग की कि केंद्र को श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को देखते हुए तुरंत कोई रास्ता निकालना चाहिए और उन्हें सुरक्षित यात्रा की अनुमति दी जानी चाहिए।
परगट सिंह ने इस मामले को धार्मिक आस्था से जुड़ा बताते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर ननकाना साहिब के दर्शन करना सिख श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए, उन्हें रोकना न केवल परंपरा के खिलाफ है, बल्कि समुदाय की आस्था को भी आहत करता है।
इसी बीच, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी बाढ़ प्रभावित पंजाब के दौरे पर हैं। इस दौरान पुलिस द्वारा रोके जाने पर परगट सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जमीनी स्तर की राजनीति में विश्वास रखते हैं।परगट सिंह ने कहा, “जब देश का नेता विपक्ष लोकसभा में बोलेगा और उसके पास जमीनी हकीकत होगी, तो उसकी आवाज़ ज्यादा प्रभावी होगी। कुछ लोग इसे गैर-प्रासंगिक बता रहे हैं, लेकिन पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में हालात को समझना बेहद ज़रूरी है।” ननकाना साहिब जाने की अनुमति न मिलने से सिख समुदाय में निराशा है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार परगट सिंह की इस मांग पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।
यह भी पढ़ें:
स्पीड स्केटिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025: भारत ने रचा इतिहास, आनंदकुमार ने जीता गोल्ड!
देहरादून में क्लाउडबर्स्ट, दो लापता; भारी बारिश से गाड़ियां व दुकानें बहीं, स्कूल बंद!
भारत-पाक ‘हैंडशेक विवाद’ पर BCCI का बयान, “अगर कोई नियम नहीं, तो मजबूरी भी नहीं”



