मुस्लिम लीग-माओवादी एजेंडे पर चलते अराजकता का मंच बन गई है कांग्रेस

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी का हमला

मुस्लिम लीग-माओवादी एजेंडे पर चलते अराजकता का मंच बन गई है कांग्रेस

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भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के ‘वोट छोड़, गद्दी छोड़’ नाम से आयोजीत रैली में प्रधानमंत्री पर अभद्र टिपण्णी को लेकर आक्रोश जताते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ कांग्रेस ने रविवार (14 दिसंबर) को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली का आयोजन किया। इस दौरान रैली में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है।

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “राम विरोधी कांग्रेस पार्टी की रामलीला मैदान में हुई कुंठाग्रस्त और घुसपैठियों का समर्थन करने वाली रैली में, आदत के चलते और निराशा में, एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। एक बार फिर उनके कार्यकर्ताओं द्वारा पीएम मोदी की मृत्यु की कामना और कब्र खुदने जैसे शब्दों के नारे लगाते हुए वीडियो सामने आए हैं। ये दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी अब मुस्लिम लीग-माओवादी एजेंडे पर चलते हुए एक राजनीतिक दल से अराजकता का मंच बनती जा रही है।”

उन्होंने कहा कि आपको राहुल गांधी की तारीफ करनी है तो करिए, मगर प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध इस तरह की अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि जहां राहुल गांधी भारत की राजनीति और अपनी पार्टी के सर्वाधिक असफल नेता साबित हुए हैं। वहीं, पीएम मोदी भारत की राजनीति और भाजपा के सर्वाधिक सफल और कर्मठ नेता साबित हुए हैं।

उन्होंने एक कहावत का जिक्र करते हुए कहा, ”अगर आप चांद पर थूकेंगे तो थूक आपके चेहरे पर ही गिरेगा।’ भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “2022 के गुजरात से लेकर 2025 के बिहार चुनाव में पीएम मोदी से कांग्रेस ने जितनी नफरत की है, उतनी ही जनता ने पीएम मोदी को मोहब्बत दी। कांग्रेस को समझना चाहिए कि जितना आप उनके खिलाफ विषवमन करते रहेंगे, उतना जनता का समर्थन प्राप्त होता रहेगा।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पीएम को गाली देने में भी अपने वोट बैंक का पूरा ध्यान रखती है। वे कुंठा में ‘कब्र’ और ‘ताबूत’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, जिनका हिंदू धर्म में कोई जिक्र नहीं है। यह उनकी छटपटाहट दिखाता है।

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