उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार (13 जुलाई) को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश पर लंबे समय तक शासन करने के लिए ‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘समाजवाद’ जैसे शब्दों की आड़ में जनता को गुमराह किया, और अब भी वही पुराना ढकोसला दोहरा रही है।
केशव मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवाद’ की नकली व झूठी बैसाखियों का सहारा लेकर कांग्रेस ने लंबे समय तक देश की सत्ता को अपने शिकंजे में कसने का सपना पाला था, लेकिन कालचक्र ने उसका यह तिलिस्म तोड़ दिया। इसके बावजूद वह अभी भी इन जर्जर बैसाखियों से सत्ता की उम्मीद पाले बैठी है।”
‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवाद’ की नकली व झूठी बैसाखियों का सहारा लेकर कांग्रेस ने लंबे समय देश की सत्ता को अपने शिकंजे में कसने का सपना पाला था। लेकिन कालचक्र ने उसका यह तिलिस्म तोड़ दिया। इसके बावजूद वह अभी भी इन जर्जर बैसाखियों से सत्ता की उम्मीद पाले बैठी है।
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) July 13, 2025
केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति, झूठ से लिपटी धर्मनिरपेक्षता और वोट बैंक के लिए राष्ट्रहित से समझौता इन पार्टियों की पुरानी आदत रही है। अब जनता इनकी दोहरे चरित्र और स्वार्थपूर्ण नीति को भली-भांति समझ चुकी है।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस और सपा का असली चेहरा अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। इनकी कथित धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद सिर्फ मजहबी ध्रुवीकरण और तुष्टिकरण की चाल है।”
जहां सपा प्रमुख अखिलेश यादव सोशल मीडिया पर लगातार भाजपा सरकार को घेरते रहते हैं, वहीं केशव मौर्य भी उतनी ही मुखरता से पलटवार करते रहे हैं। उन्होंने अखिलेश के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मॉडल को ‘परिवार बचाओ आंदोलन’ बताते हुए बार-बार सवाल उठाया है कि क्या सपा वास्तव में पिछड़ों की हितैषी है या सिर्फ ‘परिवारवाद की पोषक’।
केशव मौर्य ने हाल ही में 1975 की इमरजेंसी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि, “जिस पार्टी ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचल दिया, मीडिया की आजादी छीन ली और आम नागरिकों के मौलिक अधिकार रौंद दिए, वह आज भी ‘लोकतंत्र’ और ‘संविधान’ की दुहाई देती है। यह कांग्रेस की सबसे बड़ी राजनीतिक विडंबना है।”
हालांकि केशव मौर्य के इस बयान से साफ है कि भाजपा आने वाले विधानसभा चुनावों और संगठनात्मक रणनीतियों में वामपंथी विचारधाराओं और विपक्ष की खोंखली ‘धर्मनिरपेक्षता’ की अवधारणा पर सीधा हमला जारी रखेगी।
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