सीपी राधाकृष्णन: कांग्रेस ने दी बधाई, डॉ. राधाकृष्णन के आदर्श याद किए!

लोकतंत्र में यदि विपक्ष को स्वतंत्र और निष्पक्ष आलोचना का अधिकार नहीं दिया जाए तो वह तानाशाही का रूप ले सकता है।

सीपी राधाकृष्णन: कांग्रेस ने दी बधाई, डॉ. राधाकृष्णन के आदर्श याद किए!

chennai-bomb-threat-vice-president-cp-radhakrishnan-house

एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति बनने पर कांग्रेस ने शुभकामनाएं दीं और पहले उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के ऐतिहासिक शब्दों को याद किया। जयराम रमेश ने डॉ राधाकृष्णन के शब्दों को कोट करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को निष्पक्ष आलोचना की स्वतंत्रता न मिले तो वह तानाशाही में बदल सकता है।
उपराष्ट्रपति पद पर एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत के साथ संसद में एक नया अध्याय जुड़ गया है। बुधवार को कांग्रेस ने उन्हें जीत की बधाई दी और देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 1952 में राज्यसभा में कहे ऐतिहासिक शब्दों को याद किया। डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था कि लोकतंत्र में यदि विपक्ष को स्वतंत्र और निष्पक्ष आलोचना का अधिकार नहीं दिया जाए तो वह तानाशाही का रूप ले सकता है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि हम सीपी राधाकृष्णन को राज्यसभा का सभापति बनने पर शुभकामनाएं देते हैं। उन्होंने डॉ. राधाकृष्णन के प्रेरक शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि वे किसी एक पार्टी के नहीं थे, बल्कि पूरे सदन के थे और सभी दलों के साथ निष्पक्षता से व्यवहार करते थे।

बता दें कि चुनाव में सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी उम्मीदवार न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट हासिल हुए। कांग्रेस ने इस जीत को केवल गणितीय करार दिया और कहा कि भाजपा की यह नैतिक और राजनीतिक हार है। रमेश ने दावा किया कि विपक्ष पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है, क्योंकि रेड्डी को कुल 40% वोट मिले, जबकि 2022 में यह आंकड़ा केवल 26% था।

वहीं, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने राधाकृष्णन को सलाह दी कि वे राज्यसभा को निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले आठ वर्षों में विपक्षी सांसदों के नोटिसों की अनदेखी हुई और नियम 267 के तहत किसी जरूरी मुद्दे पर एक भी चर्चा नहीं कराई गई।

डेरेक ने दिसंबर 2023 में 146 सांसदों के निलंबन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि संसद टीवी पर विपक्ष की आवाज को सेंसर किया जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अब बहुत कम विधेयक संसदीय समितियों को भेजे जाते हैं, जिससे कानूनों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए उपराष्ट्रपति लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करेंगे।

यह भी पढ़ें-

बांग्लादेश की अदालत ने पूर्व सचिव शफीकुल इस्लाम को भेजा जेल! 

Exit mobile version