भारत के नए उपराष्ट्रपति के रूप में सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार (12 सितंबर) को शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें सुबह 10:10 बजे राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह चुनाव पिछले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के जुलाई में स्वास्थ्य कारणों से दिए गए इस्तीफे के बाद कराया गया था।
भारी बहुमत से मिली जीत
तमिलनाडु से आने वाले 67 वर्षीय वरिष्ठ बीजेपी नेता राधाकृष्णन ने विपक्षी INDI गठबंधन के उम्मीदवार और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुधर्शन रेड्डी को हराकर जीत हासिल की। राधाकृष्णन को कुल 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट मिले। बीजेपी नीत एनडीए के पास पहले से ही 427 सांसदों का समर्थन था, साथ ही वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 11 सांसदों और कुछ छोटे दलों के सहयोग से यह आंकड़ा और मजबूत हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पक्ष में कुछ क्रॉस-वोटिंग भी हुई।
#WATCH | C.P. Radhakrishnan takes oath as the 15th Vice President of India. President Droupadi Murmu administers the Oath of Office to him.
(Video Source: DD) pic.twitter.com/I91ezMHd2w
— ANI (@ANI) September 12, 2025
राज्यपाल पद से दिया इस्तीफा
शपथ लेने से पहले राधाकृष्णन ने गुरुवार (11 सितंबर)को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया। राष्ट्रपति मुर्मु ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को तब तक महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है, जब तक वहां नया राज्यपाल नियुक्त नहीं हो जाता।
दशकों का राजनीतिक अनुभव
राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर बेहद लंबा रहा है। वे दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं और भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष भी रहे। उनका राजनीतिक सफर जनसंघ से शुरू हुआ और बाद में भाजपा में जारी रहा। राधाकृष्णन अपनी जड़ों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं और पार्टी संगठन में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
उनकी यह नियुक्ति एनडीए के राजनीतिक समीकरण और संगठनात्मक मजबूती को दर्शाती है, वहीं विपक्षी खेमे के लिए यह एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
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