दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालत से जमानत मिल गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और पहले से निर्धारित बेल बॉन्ड की शर्तों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने आदेश सुरक्षित रखने के बाद दोनों को जमानत दे दी।
दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन बढ़ाने की मांग की थी। इससे पहले 13 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। आरोप है कि प्रदर्शन पर लागू प्रतिबंधों के बावजूद सीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार कर जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश किया, तिरंगा फहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए।
इसी मामले में शामिल तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को नया बेल बॉन्ड भरने के बाद राहत मिली थी। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अब राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी गैरकानूनी हो गया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया। शिंदे ने भी दावा किया कि तिरंगा लहराने और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के कारण नेताओं को जेल भेजा गया।
यह विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। सीजेपी और विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाबदेही और इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोप खारिज करते हुए कहा है कि गलत तरीके से नाम हटाए जाने पर मतदाता दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इससे पहले 10 अक्टूबर को दिपके, रांका और दास को हिरासत में लिया गया था। अगले दिन शांति बनाए रखने की शर्त पर उन्हें रिहा किया गया था। हालांकि, दिपके ने दावा किया कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड नहीं भरा था, जो भविष्य में प्रदर्शन करने से रोकता हो। इसी विवाद के बाद पार्टी ने अपना विरोध जारी रखा।
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