प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि पीड़ित महिलाओं के साथ कथित शोषण के बाद उसके गर्भपात (अबॉर्शन) के लिए कुछ स्थानीय डॉक्टरों की मदद ली गई। सूत्रों के अनुसार, इस संदर्भ में नासिक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से जुड़े एक डॉक्टर पर भी संदेह व्यक्त किया गया है, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में हलचल मच गई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी अशोक खरात स्वयं को ‘दिव्य शक्ति’ से संपन्न बताकर महिलाओं को अपने प्रभाव में लेता था और उनकी व्यक्तिगत व पारिवारिक समस्याओं का समाधान करने का झांसा देता था। इसी दौरान कई महिलाओं के साथ कथित रूप से यौन शोषण किए जाने की बात सामने आई है।
एसआईटी जांच के दौरान एक पीड़ित महिला के गर्भपात से जुड़ा मामला सामने आने के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ डॉक्टरों और सोनोग्राफी केंद्रों के साथ आरोपी के संपर्क होने की आशंका है। आरोप है कि गर्भवती होने की स्थिति में महिलाओं को गर्भपात की गोलियां उपलब्ध कराई जाती थीं। इन दवाओं की आपूर्ति कैसे हुई, इसकी भी गहन जांच की जा रही है।
साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि क्या कुछ निजी सोनोग्राफी केंद्रों में जांच के दौरान सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
इस मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में शिरडी पुलिस स्टेशन में आरोपी की पत्नी कल्पना खरात के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। उस पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और एक किसान की जमीन से संबंधित धोखाधड़ी के आरोप हैं।
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