केंद्र सरकार ने डिफेंस सेक्टर में विदेशी इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और देश में डिफेंस इक्विपमेंट बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने घोषणा की है कि देश में 3,070 करोड़ रुपये के डिफेंस इक्विपमेंट बनाए जाएंगे। इससे इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री, खासकर छोटे और मीडियम एंटरप्राइजेज, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज के साथ-साथ नई टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली कंपनियों को एक बड़ा मौका मिलेगा।
डिफेंस मिनिस्ट्री ने इंडिजिनाइजेशन की छठी लिस्ट की घोषणा की है। इस लिस्ट में 405 डिफेंस आइटम शामिल किए गए हैं। अब से, इन आइटम को विदेश से इंपोर्ट करने के बजाय घरेलू मैन्युफैक्चरर्स से खरीदने पर जोर दिया जाएगा। इस लिस्ट में डिफेंस इक्विपमेंट में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग स्पेयर पार्ट्स, सिस्टम के छोटे कंपोनेंट, सब-सिस्टम, इक्विपमेंट पार्ट्स और रॉ मटीरियल शामिल हैं। यानी, देश में सिर्फ़ बड़े हथियार या मिलिट्री गाड़ियां बनाने पर ही फ़ोकस नहीं है, बल्कि इन बड़े सिस्टम में ज़रूरी हर छोटे-बड़े पार्ट को देश में ही बनाने की कोशिश की जा रही है।
नई लिस्ट में शामिल कई आइटम इंडियन आर्मी के ज़रूरी डिफ़ेंस इक्विपमेंट में इस्तेमाल होते हैं। हल्के हेलिकॉप्टर, टैंक और हल्के फ़ाइटर एयरक्राफ़्ट के लिए ज़रूरी अलग-अलग पार्ट्स देश में ही बनाए जाएंगे। इससे हेलिकॉप्टर या फ़ाइटर एयरक्राफ़्ट का कोई छोटा पार्ट खराब होने पर उसे विदेश से मंगवाने की ज़रूरत कम हो जाएगी। अगर इसे देश में ही बनाकर सप्लाई किया जाए, तो इससे समय और विदेशी मुद्रा दोनों की बचत होगी।
रक्षा मंत्रालय ने देश में डिफ़ेंस इक्विपमेंट का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए ‘सृजन’ पोर्टल लॉन्च किया है। इसके ज़रिए घरेलू कंपनियों को विदेश से इंपोर्ट किए गए डिफ़ेंस इक्विपमेंट देश में बनाने का मौका दिया जाता है। इस पोर्टल पर अब तक 33 हज़ार से ज़्यादा डिफ़ेंस आइटम स्वदेशीकरण के लिए उपलब्ध कराए जा चुके हैं। जिनमें से 15 हज़ार 700 से ज़्यादा आइटम देश में ही सफलतापूर्वक बनाए जा चुके हैं।
पिछले कुछ सालों में भारत का डिफ़ेंस प्रोडक्शन भी काफ़ी बढ़ा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की दी गई जानकारी के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन रिकॉर्ड 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले 12 सालों में देश का डिफेंस प्रोडक्शन लगभग चार गुना बढ़ा है। इसलिए, डिफेंस इक्विपमेंट के स्वदेशीकरण और घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ावा देने से भारत की डिफेंस ताकत और बढ़ने की संभावना है। कुल मिलाकर, 3,700 करोड़ रुपये के डिफेंस इक्विपमेंट का स्वदेशीकरण सिर्फ इम्पोर्ट कम करने का फैसला नहीं है, बल्कि भारत की पूरी डिफेंस प्रोडक्शन चेन को घरेलू स्तर पर मजबूत करने की कोशिश है।
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