इतना ही नहीं योगी सरकार ने एनओसी को ऑनलाइन, लो-राइज भवनों के लिए फायर फाइटिंग सिस्टम और ढांचागत मानकों को व्यवहारिक बनाते हुए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को साकार किया है।
अग्निशमन विभाग की एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन व्यवस्था के हर क्षेत्र में सुधार करते हुए अग्निशमन विभाग को जनहित की कसौटी पर खरा उतारने का काम किया है। वर्ष 2017 से पहले अग्निशमन विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) प्राप्त करना आवेदकों के लिए बड़ी चुनौती थी।
एडीजी ने बताया कि वर्ष 2022 में लो-राइज भवनों के लिए फायर फाइटिंग सिस्टम और ढांचागत मानकों को व्यवहारिक बनाते हुए सरल किया गया। इसी वर्ष “उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा अधिनियम- 2022” को प्रख्यापित कर विभाग को आपात सेवाओं में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए सशक्त किया गया।
योगी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि अग्निशमन विभाग अब केवल अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने वाला विभाग नहीं रहा, बल्कि यह सुशासन, नागरिक सुविधा और तकनीकी सुधार का प्रतीक बन चुका है। यह परिवर्तन न केवल व्यवस्था में भरोसे को बढ़ाता है, बल्कि उत्तर प्रदेश को ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली- 2024 से इन समस्याओं का समाधान: फायर विभाग और भवन प्राधिकरण के बीच सेटबैक नियमों की विसंगतियों को खत्म करते हुए अब केवल “एक्सेस टू बिल्डिंग” के मानक के आधार पर परीक्षण होता है, जिससे फायर वाहनों की सुगम पहुंच सुनिश्चित हो गई है।
स्टेयर की चौड़ाई में लचीलापन : पहले चौड़ाई की कठोर शर्तों के कारण एनओसी रोकी जाती थी, अब ऑक्यूपेंट लोड आधारित व्यवस्था लागू कर इसे तर्कसंगत बनाया गया है। पहले स्टेयर की चौड़ाई कम होने पर एनओसी नहीं मिलती थी, भले ही कुल सीढ़ियां पर्याप्त हों। अब ऑक्यूपेंट लोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है, जिससे व्यावहारिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी गई है।
पहुंच मार्ग की चौड़ाई में परिवर्तन : अब फायर ट्रक की न्यूनतम आवश्यक चौड़ाई को ही मानक माना गया है, जिससे पुराने कस्बों और संकरे रास्तों में भी नियम लागू हो पाते हैं। पहले निर्धारित मानक अत्यधिक थे, अब उन्हें फायर टेंडर की आवश्यक चौड़ाई के अनुरूप व्यावहारिक बनाया गया है।
वॉटर टैंक की लचीलापन व्यवस्था : अब आवेदक को कुल आवश्यक पानी की मात्रा कहीं भी (ओवरहेड या अंडरग्राउंड) उपलब्ध कराने की छूट दी गई है, जिससे स्थान की समस्या से राहत मिली है। पहले ओवरहेड और अंडरग्राउंड टैंक के लिए अलग-अलग क्षमता की शर्तें थीं। अब कुल पानी भूमिगत या ऊपरी टैंक के माध्यम से उपलब्ध कराना स्वीकार्य है।
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