भाजपा की प्रचंड जीत के बाद वर्षों से बंद दुर्गा मंदिर खुला

ममता सरकार की विदाई और भाजपा की सुनामी के बाद खुला मंदिर का द्वार; आसनसोल उत्तर के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने किया चुनावी वादा पूरा

भाजपा की प्रचंड जीत के बाद वर्षों से बंद दुर्गा मंदिर खुला

Durga Temple, closed for years, reopens after BJP's landslide victory

पश्चिम बंगाल में हिंदू अब खुलकर साँस लेने लगे है, अपने धर्म और राष्ट्रीयत्व की विचारधारा को खुलकर प्रगट करने लगे है। विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत के बाद राज्य में एक बड़े सांस्कृतिक और राजनीतिक बदलाव की लहर दिखाई देने लगी है। पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल में स्थानीय मुसलमानों द्वारा रोक, दंगे की धमकियां और ममता सरकार द्वारा पाबंदियों के कारण वर्षों से बंद पड़ा एक प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर सोमवार (4 मई) को अंततः श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिया गया।

श्री श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित यह मंदिर पिछले कई वर्षों से लगभग पूरी तरह बंद था। यहाँ केवल दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा जैसे विशेष अवसरों पर ही सीमित पूजा-अर्चना की अनुमति थी। मंदिर के बंद रहने के पीछे इस्लामिस्टों द्वारा दंगे और ममता सरकार के कड़े प्रतिबंध मुख्य कारण बने रहें।

आसनसोल उत्तर से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान यह संकल्प लिया था कि यदि वे जीतते हैं, तो इस मंदिर को साल भर के लिए खुलवाएंगे। जीत के बाद अपना वादा निभाते हुए उन्होंने सोमवार को मंदिर के द्वार खुलवाए, जहाँ बड़ी संख्या में भक्तों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहुँचकर पूजा-अर्चना की और जश्न मनाया।

यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में हुए बड़े राजनीतिक उलटफेर के ठीक बाद हुआ है। राज्य की 293 सीटों में से 206 सीटें जीतकर भाजपा ने ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत कर दिया है। भाजपा ने 147 के बहुमत के आंकड़े को बहुत पीछे छोड़ते हुए 206 सीटें हासिल कीं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) मात्र 80 सीटों पर सिमट गई है, जबकि राजारहत न्यू टाउन सीट पर अभी एक दौर की गिनती बाकी है। पश्चिम बर्धमान जिले में भाजपा ने क्लीन स्वीप करते हुए जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया है।

स्थानीय निवासियों के लिए इस मंदिर का खुलना केवल एक धार्मिक मामला नहीं है, बल्कि इसे राज्य में वॉकिजम और मुस्लिम तुष्टीकरण के दौर के अंत के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन के डर से जिस मंदिर के द्वार बंद थे, वहां अब निर्भय होकर पूजा की जा सकेगी।

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान हुआ था, जिसमें 92 प्रतिशत से अधिक का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग ने गंभीर चुनावी अपराधों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के हनन का हवाला देते हुए फालता (Falta) सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान (Repolling) कराने का निर्णय लिया है। फालता सीट के नतीजे 24 मई को घोषित किए जाएंगे।

दौरान मंदिर पर लगी पाबंदियां हटाने का वादा करने वाले भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा, “यह जीत बंगाल की अस्मिता और अधिकारों की जीत है। हमने वादा किया था कि अन्याय की वजह से बंद हुए मंदिरों के ताले खुलेंगे और आज आसनसोल की जनता ने अपनी आँखों से बदलाव की शुरुआत देख ली है।”

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