बंगाल में 4 चुनाव अधिकारियों का निलंबन, चुनाव आयोग की सख्त चेतावनी!

 “अब किसी को नहीं मिलेगी ढील”

बंगाल में 4 चुनाव अधिकारियों का निलंबन, चुनाव आयोग की सख्त चेतावनी!

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पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया में लापरवाही और अनियमितता पर चुनाव आयोग (ECI) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने मंगलवार (5 अगस्त) को राज्य के मुख्य सचिव मनोज पंत को निर्देश दिया कि वे चार चुनाव अधिकारियों को तत्काल निलंबित करें। यह कार्रवाई न केवल इन अधिकारियों के खिलाफ है, बल्कि पूरे राज्य के चुनाव तंत्र को स्पष्ट संदेश देने के लिए की गई है कि अब किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर कठोर दंड तय है। चारों निलंबित अधिकारी दो अलग-अलग जिलों के दो विधानसभा क्षेत्रों में तैनात थे। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने इन निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में ग़लत तरीके से नाम जोड़े, जो कि चुनाव प्रक्रिया की गंभीर अनदेखी है।

इस मामले में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने प्रारंभिक जांच की, जिसके बाद इन चार अधिकारियों दो Electoral Returning Officers (EROs) और दो Assistant Electoral Returning Officers (AEROs) और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ रिपोर्ट आयोग को सौंपी गई।

आयोग की जांच में सामने आया कि न केवल इन अधिकारियों ने मतदाता आवेदनों का सही तरीके से निपटारा नहीं किया, बल्कि उन्होंने चुनावी पंजीकरण डेटाबेस के लॉगिन क्रेडेंशियल्स अवैध रूप से तीसरे पक्ष के साथ साझा किए, जो डेटा सुरक्षा नीति का सीधा उल्लंघन है।

चुनाव आयोग ने सिर्फ निलंबन तक ही सीमित न रहते हुए, राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन सभी पांचों लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित अधिकारियों को कम से कम तीन महीने की जेल और दो साल तक की सजा व जुर्माना हो सकता है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “आयोग का संदेश स्पष्ट है — अब हर कोई रडार पर है। चुनावी प्रक्रिया में अब कोई गड़बड़ी छुप नहीं सकेगी। हम भी अपने स्तर पर सभी चुनाव अधिकारियों को चेतावनी दे रहे हैं कि वे केवल नियम पुस्तिका के अनुसार ही कार्य करें, वरना कठोर कार्रवाई तय है।”

इस कदम को विशेषज्ञ 2026 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र पूर्व संकेत के रूप में देख रहे हैं। चुनाव आयोग ने यह दिखा दिया है कि वह राज्य की चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर कोई भी ढील देने को तैयार नहीं है। यह कार्रवाई एक नजीर बन सकती है — न सिर्फ बंगाल में, बल्कि देशभर के चुनाव अधिकारियों के लिए भी, कि अब लापरवाही, पक्षपात या तकनीकी सुरक्षा में कोई चूक सीधे निलंबन और कानूनी कार्रवाई में बदलेगी।

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