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Thursday, March 26, 2026
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MSCB घोटाले में रोहित पवार के खिलाफ ईडी ने दायर की शिकायत

EOW मामले को बंद करने की कर रही है मांग

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महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्जत-जामखेड़ के विधायक और शरद पवार के भतीजे रोहित पवार के खिलाफ इस सप्ताह की शुरुआत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दायर की है। यह शिकायत ऐसे समय में दाखिल की गई है जब इस मामले की मूल जांच एजेंसी आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इसे बंद करने की सिफारिश कर रही है।

ईडी की ओर से दाखिल की गई इस शिकायत पर अदालत की ओर से अब तक संज्ञान नहीं लिया गया है। वहीं, ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट को लेकर ईडी और शिकायतकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया है। अदालत में अभी इस क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई बाकी है, और इसी के बीच ईडी ने अपनी ओर से अभियोजन शिकायत दाखिल कर दी है।

ईडी के मुताबिक, MSCB के तत्कालीन प्रबंधन ने बैंक के निदेशकों के रिश्तेदारों के नियंत्रण वाली शुगर मिल्स/कंपनियों को बिना लोन चुकाने की क्षमता का मूल्यांकन किए ऋण दिए। इसके साथ ही जब ये कंपनियां कर्ज चुकाने में असफल रहीं, तो बैंक ने SARFAESI अधिनियम, 2002 के प्रावधानों का पालन किए बिना ही चीनी सहकारी कारखानों (SSK) की नीलामी कर दी।

ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि जिन SSK की नीलामी की गई, वे रिजर्व प्राइस से भी कम कीमत पर बेची गईं। रोहित पवार की कंपनी बारामती एग्रो लिमिटेड, जिसने कन्नड़ सागर यूनिट का स्वामित्व रखा था, को भी इस कथित घोटाले में शामिल बताया गया है। ईडी ने पहले ही बारामती एग्रो लिमिटेड की कुछ संपत्तियों को अटैच कर लिया है। माना जा रहा है कि एजेंसी की शिकायत में इन संपत्तियों का विवरण और उनके लेन-देन से जुड़े तथ्य शामिल किए गए हैं।

अब अदालत के सामने दो अहम बिंदुओं पर विचार किया जाना है। पहला, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट, जिसमें इस मामले को बंद करने की सिफारिश की गई है। दूसरा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दाखिल की गई अभियोजन शिकायत, जिसमें रोहित पवार की भूमिका को मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों के तहत उजागर किया गया है।

अदालत को तय करना है कि क्या ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट को स्वीकार कर मामला बंद किया जाए या फिर ईडी की शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए। इन दोनों पक्षों के आधार पर अदालत का अगला फैसला रोहित पवार के राजनीतिक और कानूनी भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

इस मामले में अदालत की अगली सुनवाई पर निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह तय करेगा कि क्या रोहित पवार के खिलाफ जांच आगे बढ़ेगी या ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया जाएगा। वहीं, यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर एनसीपी और पवार परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को हवा दे सकता है।

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