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Sunday, March 29, 2026
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चित्रदुर्ग में कांग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र के घरों पर ईडी का छापा!

2016 की पुरानी करंसी कांड से जुड़ी जांच तेज

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बेंगलुरु और चित्रदुर्ग में शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस विधायक के.सी. वीरेंद्र और उनके परिवार से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित तौर पर गेमिंग ऐप्स से जुड़े अवैध मनी ट्रांसफर की जांच के तहत की गई है। जानकारी के अनुसार, ईडी की दिल्ली से आई टीम ने निजी वाहनों से पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया।

अधिकारियों ने बताया कि छापे चल्लकेरे शहर में विधायक वीरेंद्र के घर, उनके भाइयों के.सी. नागराजा और के.सी. टिप्पेस्वामी के आवासों पर डाले गए। इसके अलावा विधायक के रिश्तेदार होसामने स्वामी की संपत्तियों और बेंगलुरु के सहकारनगर स्थित वीरेंद्र के घर की भी तलाशी ली गई। साथ ही वीरशैव एसोसिएशन के सचिव प्रसन्ना कुमार के आवास पर भी ईडी की कार्रवाई हुई।

ईडी सूत्रों ने बताया कि छापेमारी का दायरा केवल व्यक्तिगत संपत्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन कंपनियों पर भी फोकस किया गया जिन पर वीरेंद्र और उनके परिवार का नियंत्रण है। इनमें रत्ना गोल्ड, रत्ना मल्टी सोर्स, पप्पी टेक्नोलॉजी और रत्ना गेमिंग सॉल्यूशंस शामिल हैं। आरोप है कि इन्हीं कंपनियों का इस्तेमाल गेमिंग ऐप्स के जरिए अवैध धन के लेन-देन के लिए किया गया।

फिलहाल विधायक वीरेंद्र राज्य से बाहर एक व्यावसायिक दौरे पर हैं। ईडी की टीम ने सुबह-सुबह छापेमारी शुरू कर दी थी और अब तक की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। गौरतलब है कि 2016 में विमुद्रीकरण (डिमोनेटाइजेशन) के दौरान भी वीरेंद्र का नाम बड़े घोटाले में सामने आया था। उस समय वह जेडी(एस) में थे। आयकर विभाग ने उनके चल्लकेरे स्थित घर में बाथरूम की टाइलों के पीछे बने गुप्त कक्ष से 5.70 करोड़ रुपये की नई करंसी, 32 किलो सोने के बिस्कुट, आभूषण और 90 लाख रुपये के पुराने नोट बरामद किए थे।

इस मामले में वीरेंद्र के अलावा चित्रदुर्ग के दो बिचौलियों और चार बैंकों के अज्ञात अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में सीबीआई की जांच में सामने आया कि विधायक और बैंक अधिकारियों ने मिलकर 5.76 करोड़ रुपये के पुराने नोटों को 2,000 और 500 के नए नोटों में बदलने की आपराधिक साजिश रची थी। CBI के आरोपपत्र में कहा गया था कि बैंक अधिकारियों ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर कई फर्जी पहचान पत्र बनाए ताकि यह दिखाया जा सके कि नोटबंदी के बाद भी भारी मात्रा में कैश का लेन-देन एटीएम काउंटरों से हुआ।

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