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Saturday, April 18, 2026
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वसई-विरार की तिजोरी पर बिजली बिल और वाहन मरम्मत का बोझ!, सौर ऊर्जा की अनदेखी!

विपक्ष के नेता मनोज पाटिल ने प्रशासन को घेरा!

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वसई-विरार शहर महानगरपालिका की वर्ष 2026-27 की बजट महासभा 25 मार्च को आयोजित हुई। इस बैठक में प्रशासन द्वारा प्रस्तुत बजट के आंकड़ों में असंगतियां और योजना की कमी को विपक्ष के नेता मनोज पाटिल ने उजागर किया। खासकर महानगरपालिका के बढ़ते बिजली बिल और वाहन मरम्मत के नाम पर हो रहे भारी खर्च को लेकर उन्होंने प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया और जनता के पैसे की इस फिजूलखर्ची को रोकने की चेतावनी दी।

इस पर महापौर अजीव पाटिल ने सावधानी भरा रुख अपनाते हुए अनावश्यक खर्च कम करने और बिलों की दोबारा जांच करने के सख्त निर्देश दिए।

महासभा में मनोज पाटिल ने महानगरपालिका के बिजली बिल का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। पालिका ने अगले वर्ष के लिए लगभग 83 करोड़ रुपये बिजली बिल का प्रावधान किया है। इस पर बोलते हुए पाटिल ने कहा कि जब राज्य सरकार सोलर सिस्टम के लिए 70 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है, तब भी पालिका प्रशासन सौर ऊर्जा के मामले में पीछे क्यों है?

उन्होंने कहा कि प्रशासन ने सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए कोई समयबद्ध कार्ययोजना तैयार नहीं की है। केवल ग्रीन एनर्जी की बातें करने से काम नहीं चलेगा, इसकी वास्तविक अमल कब होगी?

महानगरपालिका का हर महीने 50 से 60 लाख रुपये का बिल केवल चार्जिंग स्टेशनों और प्रशासनिक इमारतों के लिए आता है। यदि समय रहते सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू की जातीं, तो करोड़ों रुपये की बचत विकास कार्यों में लगाई जा सकती थी।

इस पर महापौर अजीव पाटिल ने कहा कि पहले चरण में सभी प्रशासनिक इमारतों पर सोलर पैनल लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही एमएसईबी से आने वाले बिलों की हर तीन-चार महीने में क्रॉस-वेरिफिकेशन करने के निर्देश भी बिजली विभाग को दिए गए हैं।

बैठक का एक बड़ा मुद्दा महानगरपालिका के वाहन मरम्मत खर्च का भी रहा। मनोज पाटिल ने कहा कि वाहनों की मरम्मत और रखरखाव पर होने वाले खर्च और सड़कों पर चलने वाले वाहनों की वास्तविक संख्या में मेल नहीं है।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि कई बार कबाड़ होने लायक गाड़ियों की मरम्मत पर भी लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह खर्च पालिका की तिजोरी में लगी “लीकेज” की तरह है, जिसे तुरंत रोकना जरूरी है।

महापौर अजीव पाटिल ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए वाहन मरम्मत खर्च पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां जरूरी हो वहीं मरम्मत करें और जहां संभव हो खर्च कम किया जाए। साथ ही जिन विभागों में अनावश्यक बजट बढ़ाया गया है, उसे घटाकर विकास कार्यों की ओर मोड़ने को भी कहा गया।

संपत्ति कर के मुद्दे पर भी मनोज पाटिल ने प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल उठाया। पिछले वर्ष सर्वेक्षण पर 17 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, इस वर्ष 20 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं और अगले वर्ष फिर 15 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।

उन्होंने कहा कि वसूली के मुकाबले 5 प्रतिशत खर्च केवल सर्वेक्षण पर होना आश्चर्यजनक है। जब गैस कनेक्शन और बिजली के आंकड़े उपलब्ध हैं, तो हर साल यह सर्वेक्षण क्यों किया जा रहा है?

मनोज पाटिल ने शहर के तालाबों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए बजट में ठोस प्रावधान करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि केवल सौंदर्यीकरण के बजाय तालाबों के प्राकृतिक जल स्रोतों को जीवित रखने की योजना बनानी चाहिए।

महापौर ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए तालाबों के काम के लिए आवश्यक फंड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

महासभा में विपक्ष द्वारा उठाए गए कई जनहित के मुद्दों के कारण प्रशासन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। अब शहरवासियों की नजर इस बात पर है कि महापौर द्वारा दिए गए पारदर्शिता और खर्च कटौती के निर्देशों को प्रशासन कितनी गंभीरता से लागू करता है।

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