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Tuesday, June 2, 2026
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भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा वार्ता में सैन्य सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर जोर!

द्विपक्षीय वार्ता के उपरांत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नई दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ उनकी यह मुलाकात और बातचीत उत्कृष्ट रही।

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नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस वार्ता में दोनों देशों के रक्षा सहयोग की पूरी रूपरेखा की समीक्षा की गई।

द्विपक्षीय वार्ता के उपरांत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नई दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ उनकी यह मुलाकात और बातचीत उत्कृष्ट रही। दोनों देशों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की। इसके साथ ही भारत, ऑस्ट्रेलिया ने इसे संवाद व सहयोग को और आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी आने वाले वर्षों में लगातार प्रगति करने के लिए तैयार है। सोमवार को हुई इस बातचीत से पहले ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स का नई दिल्ली में औपचारिक स्वागत किया गया।

उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित रहे। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक शुरू हुई। प्रतिनिधिमंडल में शीर्ष सैन्य अधिकारी व रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

वार्ता के दौरान राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार की हाल ही में जारी 2026 नेशनल डिफेंस स्ट्रेटेजी और इंटीग्रेटेड इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम की सराहना की। रक्षा मंत्री ने इस विषय पर कहा कि वह ऑस्ट्रेलियाई सरकार को हाल ही में प्रकाशित 2026 राष्ट्रीय रक्षा रणनीति और एकीकृत निवेश कार्यक्रम के लिए बधाई देना चाहते हैं।

उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री से कहा कि आज की चर्चा के दौरान वह इस नीति दस्तावेज पर उनके विचारों को सुनने और भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंधों में विकास की संभावनाओं पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हैं।

बैठक में दोनों देशों ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंध अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुए हैं। दोनों पक्षों ने रक्षा और सैन्य सहयोग को और गहरा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विस्तार करने, समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने, रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी मजबूत करने तथा नई रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को देखते हुए यह वार्ता विशेष महत्व रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थक हैं। दोनों देश क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी निकट सहयोग कर रहे हैं और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता तथा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए साझा दृष्टिकोण रखते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि रिचर्ड मार्ल्स की यह यात्रा केवल एक औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया अपनी रणनीतिक साझेदारी को अगले चरण में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में बढ़ती निकटता, साझा सुरक्षा हित और हिंद-प्रशांत में स्थिरता बनाए रखने की समान सोच दोनों देशों को पहले से कहीं अधिक करीब ला रही है।

सोमवार को नई दिल्ली में हुई यह वार्ता ने स्पष्ट कर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

गौरतलब है कि यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। वहीं समुद्री सुरक्षा से लेकर क्षेत्रीय स्थिरता तक कई नए सुरक्षा आयाम उभर रहे हैं। ऐसे में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

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