“4 मई के बाद भाजपा भी नहीं बचा पाएगी” टीएमसी की IPS अजय पाल शर्मा को धमकी

“4 मई के बाद भाजपा भी नहीं बचा पाएगी” टीएमसी की IPS अजय पाल शर्मा को धमकी

“Even the BJP will not be able to save itself after May 4th.”

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने चुनाव ड्यूटी पर तैनात IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को चेतावनी दी है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि उनकी नियुक्ति राजनीतिक रूप से प्रेरित है और यदि उन्होंने एक निष्पक्ष पर्यवेक्षक की भूमिका से आगे बढ़ने की कोशिश की, तो इसका राजनीतिक विरोध किया जाएगा।दक्षिण 24 परगना में चुनावी ड्यूटी पर बतौर ऑब्ज़र्वर मौजूद IPS अजय पाल शर्मा ने हाल ही में TMC उम्मीदवार द्वारा गुंडे भेजकर मतदाताओं को डराने को लेकर ऐतराज जताया था, जिसका वीडिओ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने सीधे तौर पर धमकी देते हुए कहा है, 4 मई के बाद भाजपा आपको नहीं बचा पाएगी और साथ ही पार्टी प्रवक्ता ने अधिकारी पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अतिरिक्त कार्रवाई  को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसका राजनीतिक जवाब दिया जाएगा।

विवाद तब और गहरा गया जब पार्टी नेताओं ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें IPS अजय पाल शर्मा TMC उम्मीदवार की गैरमौजूदगी में गुंडे भेजकर मतदाताओं को डराने वालों को चेतावनी दे रहें है। वीडिओ में अजय पाल शर्मा कहते दीखते है की, “अगर किसी ने बदमाशी करि, तो उसका कायदे से इलाज किया जाएगा।”  यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।

टीएमसी ने 2020 के एक कथित ‘कैश-फॉर-पोस्टिंग’ मामले और अन्य आरोपों का भी जिक्र किया, जिनमें शर्मा का नाम सामने आया था। पार्टी ने एक महिला द्वारा लगाए गए व्यक्तिगत दुर्व्यवहार के आरोपों का भी हवाला दिया, हालांकि इन आरोपों से शर्मा ने पहले इनकार किया है और वे लगातार वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे हैं।

बता दें की, अजय पाल शर्मा उत्तर प्रदेश में अपनी कठोर पुलिसिंग की छवि के लिए जाने जाते हैं।

यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल के संवेदनशील चुनावी माहौल में और तनाव जोड़ रहा है। टीएमसी जहां इस नियुक्ति को “राजनीतिक हस्तक्षेप” बता चुनावी प्रक्रिया की निगरानी कर रही संस्थाओं की भूमिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।  राज्य में बढ़ती राजनीतिक तल्खी के बीच प्रशासन पर निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने का दबाव और बढ़ गया है।

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