फडणवीस का कांग्रेस पर हमला, संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप!

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "जिस प्रकार की अराजकता का परिचय कांग्रेस पार्टी और उनके साथी दे रहे हैं, उन सभी का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है।

फडणवीस का कांग्रेस पर हमला, संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप!

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर देश में अराजकता फैलाकर संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया है। सीएम ने कहा कि विपक्ष का मौजूदा रवैया सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसका अंतिम लक्ष्य लोगों का लोकतांत्रिक संस्थाओं से भरोसा तोड़ना है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “जिस प्रकार की अराजकता का परिचय कांग्रेस पार्टी और उनके साथी दे रहे हैं, उन सभी का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है। वो भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना चाहते हैं, ताकि संवैधानिक संस्थाओं से लोगों का विश्वास उठ जाए, इस प्रकार से रोज झूठ बोलना, फिर लोगों में ये विश्वास पैदा करना कि भारत की संवैधानिक संस्थाएं चरमराई हैं, ये संस्थाएं आपको इंसाफ नहीं दे सकती, उसके बाद भारत के संविधान को ही नकारना, इस प्रकार का षणयंत्र चल रहा है। ये आंदोलन उसी का एक भाग है।”

उन्होंने कहा कि ये हाथ में संविधान लेकर असंवैधानिक काम करते हैं। निश्चित रूप से ये चाहते हैं कि भारत में कट्टर वामपंथी शासन आए। इसी के लिए भारत में ये कलाकारी चल रही है। ये भारत के संविधान को नकारना चाहते हैं और लोगों के मन में संविधान के प्रति नकारात्मकता भरना चाहते हैं, ये उसी का आंदोलन चल रहा है।

सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि मुंबई से दिल्ली की फ्लाइट भाजपा की फंडिंग से की गई थी और मेरी फंडिंग चेक करने से पहले भाजपा के इलेक्टोरल बॉन्ड्स और अकाउंट्स की जांच करनी चाहिए। इसे लेकर सवाल पूछे जाने पर सीएम फडणवीस ने कहा कि कोई भी मूर्खतापूर्ण बात करेगा और मैं उस पर टिप्पणी करूं, इतना खाली नहीं हूं।

इसके अलावा, एसआईआर विवाद को लेकर डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि कई वोटरों के नाम हटा दिए गए थे। यही समस्या और मुद्दा है जिसे हम यहां उठा रहे हैं। सभी वोटरों के नाम लिस्ट में होने चाहिए, लेकिन एसआईआर के दौरान कई वोटरों को लिस्ट से हटा दिया गया।

उन्होंने कहा कि जब वे (विपक्ष) विरोध करना चाहते हैं और पार्लियामेंट तक जुलूस निकालना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने की इजाजत मिलनी चाहिए लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें संसद तक जाने से रोक दिया। विरोध करना हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है।

धारापुरम उपचुनाव के दौरान एक अधिकारी ने एक बुजुर्ग महिला को सीटी के निशान पर वोट देने के लिए कहा था, उसका ट्रांसफर कर दिया गया है। इसे लेकर डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि कोई पोलिंग अधिकारी किसी को किसी खास निशान पर वोट देने के लिए कैसे कह सकता है?

यह बिल्कुल गलत है और उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था, लेकिन विजय की सरकार में क्या होगा जब उसे एडमिनिस्ट्रेशन नहीं आता? वह सिर्फ डीएमके के खिलाफ बात करेगा, अपनी समस्याओं के बारे में नहीं। वह अपना बचाव भी नहीं करेगा।
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