आसाम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार(16 फरवरी) सुबह पार्टी से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों बाद अपना फैसला वापस ले लिया। उनके इस्तीफे के बाद प्रदेश कांग्रेस सकते में आ गई थी। सुबह उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को ईमेल के जरिए इस्तीफा भेजा था। समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने पत्र में लिखा कि राज्य इकाई में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है और नेतृत्व द्वारा उन्हें उचित महत्व नहीं दिया जा रहा।
इस्तीफे की खबर फैलते ही कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता उनके गुवाहाटी स्थित आवास पहुंचे। इनमें असम कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष गौरव गोगोई, भंवर जितेंद्र सिंह, प्रद्युत बोर्डोलोई और रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, नेताओं ने बोरा को मनाने और पार्टी में बने रहने के लिए समझाने का प्रयास किया। कुछ घंटों बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लेने का फैसला किया।
इस बीच आसाम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने बोरा को असम कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता बताते हुए कहा कि वह मंगलवार (17 फरवरी)शाम उनके घर जाएंगे। सरमा ने दावा किया कि कांग्रेस की स्थिति राज्य में कमजोर हो चुकी है और आने वाले दिनों में कुछ और विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं।
भूपेन बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और पिछले वर्ष उनकी जगह गौरव गोगोई को जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी के भीतर यह धारणा बनी थी कि नेतृत्व परिवर्तन से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी, लेकिन इस फैसले से आंतरिक असंतोष भी उभरा। बोरा को उन नेताओं में माना जाता है जिन्होंने लगातार दो विधानसभा चुनावों में हार के बाद जमीनी स्तर पर पार्टी को पुनर्गठित करने का प्रयास किया था।
पत्रकारों से बातचीत में बोरा ने कहा कि उनका फैसला किसी व्यक्ति विशेष या निजी कारण से प्रेरित नहीं था। उन्होंने कहा, “मैंने 32 साल तक कांग्रेस की सेवा की है और मैं पार्टी के भविष्य को लेकर चिंतित हूं। मैंने पार्टी के उच्च कमान को भेजे गए अपने इस्तीफे पत्र में अपने इस्तीफे के कारणों का विस्तार से उल्लेख किया है।”
आसाम में आगामी चुनावों से पहले यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि फिलहाल बोरा द्वारा इस्तीफा वापस लेने से पार्टी नेतृत्व को राहत मिली है, लेकिन आंतरिक मतभेदों के संकेत राजनीतिक चर्चाओं का विषय बने हुए हैं।
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