33 C
Mumbai
Saturday, May 30, 2026
होमदेश दुनियामूगा सिल्क से नागा मिर्च तक, विश्व मंच पर चमका पूर्वोत्तर का...

मूगा सिल्क से नागा मिर्च तक, विश्व मंच पर चमका पूर्वोत्तर का जीआई गौरव!

जीआई यानी ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ ऐसे उत्पादों को दिया जाता है, जिनकी विशेषता किसी खास क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु, परंपरा या कारीगरी से जुड़ी होती है।

Google News Follow

Related

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इटली यात्रा केवल राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस दौरे ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई। दुनिया के बड़े नेताओं को भारत के अलग-अलग राज्यों से चुने गए जीआई टैग प्राप्त उत्पाद भेंट कर प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता, परंपरा और स्थानीय हुनर में बसती है।

जब विविधता, परंपरा और स्थानीय हुनर की बात होती है, तो पूर्वोत्तर भारत के आठों राज्यों का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इटली सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रमुख नेताओं को भारत के विभिन्न हिस्सों से जुड़े विशेष उत्पाद उपहार में दिए। इनमें असम का प्रसिद्ध मूगा रेशम शॉल भी शामिल था। इन उपहारों ने न सिर्फ भारत की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने रखा, बल्कि स्थानीय कारीगरों और किसानों के वर्षों पुराने कौशल को भी सम्मान दिलाया।

पूर्वोत्तर भारत आज केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक समृद्धि, पारंपरिक कला और जैविक उत्पादों के कारण भी वैश्विक पहचान बना रहा है। यहां के जीआई टैग प्राप्त उत्पाद यह साबित करते हैं कि भारत की असली शक्ति गांवों, कारीगरों और किसानों की मेहनत में छिपी हुई है।

दरअसल, भारत के लिए जीआई टैग केवल कानूनी पहचान नहीं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। जीआई यानी ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ ऐसे उत्पादों को दिया जाता है, जिनकी विशेषता किसी खास क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु, परंपरा या कारीगरी से जुड़ी होती है। यही कारण है कि आज भारत के 600 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है।

पूर्वोत्तर भारत इस मामले में देश का सबसे समृद्ध और अनोखा क्षेत्र बनकर उभरा है। यहां की कृषि, हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्रों ने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई है। असम का मूगा सिल्क इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सुनहरे रंग का यह रेशम अपनी चमक और मजबूती के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इसके अलावा, असम की जोहा राइस, काजी नेमू, बोका चाऊल, तेजपुर लीची और गमोसा भी जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में शामिल हैं।

मणिपुर की पारंपरिक बुनाई कला भी देश की सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है। यहां का शाफी लानफी और वांगखेई फी वस्त्र विशेष अवसरों पर पहने जाते हैं। मोइरांग-फी कपड़े की खास डिजाइन और पारंपरिक शैली इसे अलग पहचान देती है। वहीं, मणिपुर का चक-हाओ काला चावल अपने स्वाद और औषधीय गुणों के कारण बेहद लोकप्रिय है। कचाई नींबू और तामेंगलोंग संतरा भी यहां की खास पहचान बन चुके हैं।

मेघालय की खासी मैंड्रिन संतरा और मेमोंग नारंग अपनी मिठास और रसदार स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं, मिजोरम की पारंपरिक शॉल और वस्त्र जैसे मिजो पुआनचेई, पवांडम और तावल्लोहपुआन राज्य की समृद्ध संस्कृति को दर्शाते हैं। मिजो मिर्च और मिजो अदरक भी अपनी गुणवत्ता के कारण अलग पहचान रखते हैं।

नागालैंड का नागा किंग चिली, जिसे भूत जोलोकिया भी कहा जाता है, दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों में गिना जाता है। इसके अलावा, नागा ट्री टमाटर और नागा खीरा भी यहां की पारंपरिक खेती और खानपान का अहम हिस्सा हैं। नागालैंड का चाखेसांग शॉल अपनी खूबसूरत बुनाई और डिजाइन के लिए प्रसिद्ध है।

त्रिपुरा का क्वीन पाइन एप्पल अपनी मिठास और खुशबू के लिए जाना जाता है। वहीं, रीसा और रिग्नाई-पचरा वस्त्र राज्य की पारंपरिक पहचान माने जाते हैं। सिक्किम की बड़ी इलायची और डल्ले मिर्च भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी गुणवत्ता के कारण मांग में हैं।

अरुणाचल प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पाद राज्य की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक विविधता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। यहां का वाक्रो संतरा अपने खास मीठे-खट्टे स्वाद और अधिक रस के लिए प्रसिद्ध है। इदु मिश्मी टेक्सटाइल पारंपरिक हथकरघा कला का बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें ज्यामितीय डिजाइन और प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है।

राज्य का खाव ताई यानी खामती चावल अपनी सुगंध और स्वाद के लिए मशहूर है। यह स्थानीय जनजातियों के खानपान और परंपराओं का अहम हिस्सा है। वहीं, याक चुरपी, जो याक के दूध से तैयार की जाती है, अरुणाचल के पहाड़ी इलाकों में बेहद लोकप्रिय खाद्य उत्पाद है। तांगसा टेक्सटाइल भी यहां की पारंपरिक बुनाई कला का शानदार नमूना माना जाता है।

वास्तव में, जीआई टैग पूर्वोत्तर राज्यों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इससे स्थानीय किसानों, बुनकरों और कारीगरों को नई पहचान मिलने के साथ-साथ उनके उत्पादों की कीमत और मांग दोनों बढ़ रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। साथ ही, विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

यह भी पढ़ें- 

फीफा ने ईरान के पक्ष में लिया बड़ा फैसला, वर्ल्ड कप बेस कैंप को मेक्सिको स्थानांतरित किया! 

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,471फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
310,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें