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“E 20 पेट्रोल से कोई गाड़ी खराब हुई हो तो एक उदाहरण दिखाएं”

नितिन गडकरी की खुली चुनौती

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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर फैल रही आशंकाओं और आलोचनाओं को सिरे से खारिज करते हुए आलोचकों को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि देश में किसी एक भी गाड़ी को 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से कोई नुकसान हुआ है, तो उसका उदाहरण सामने लाया जाए। गडकरी शुक्रवार (8 अगस्त) को Business Today India@100 Summit के एक सत्र को संबोधित कर रहे थे।

गडकरी ने कहा, “20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल इस्तेमाल करने से देश में एक भी कार को कोई दिक्कत हुई हो, तो उसका नाम बताइए। अब तक कोई शिकायत नहीं आई है।” उन्होंने इस मामले में दुष्प्रचार फैलाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग सरकार के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के खिलाफ जानबूझकर गलत जानकारी फैला रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस योजना को Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) और Automotive Research Association of India (ARAI) का समर्थन प्राप्त है। इसके साथ ही उन्होंने इथेनॉल के प्रयोग के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को भी रेखांकित किया। “इथेनॉल से न केवल कच्चे तेल के आयात बिल में कमी आएगी, बल्कि किसानों को भी नई आमदनी के स्रोत मिलेंगे,” गडकरी ने कहा।

उन्होंने बताया कि पहले मक्का किसानों को ₹1,200 प्रति क्विंटल मिलते थे, लेकिन अब इथेनॉल उत्पादन के चलते यह दर ₹2,600 तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा,“यह सीधे किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद कर रहा है। यह कृषि को ऊर्जा और बिजली की ओर मोड़ने का प्रयास है।” गडकरी ने यह भी संकेत दिया कि आलोचना करने वालों के पीछे कुछ स्वार्थ हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “कुछ लोगों के निहित स्वार्थ हो सकते हैं, लेकिन हमें उनकी चिंता नहीं करनी है। ARAI जैसी संस्थाओं से परीक्षण करवाने के बाद ही मंत्रालय मानक तय करता है।”

उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल से वाहन की परफॉर्मेंस पर प्रभाव को लेकर देशभर में सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी हाल ही में इन शंकाओं को अवैज्ञानिक और निराधार करार देते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है।

मंत्रालय के अनुसार E20 पर आधारित कार्बोरेटेड और फ्यूल-इंजेक्टेड वाहनों पर 1 लाख किलोमीटर की टेस्टिंग की गई है, जिसमें हर 10,000 किमी पर प्रदर्शन का मूल्यांकन हुआ। इनमें पावर, टॉर्क और माइलेज में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। यहां तक कि पुरानी कारों में भी कोई असामान्य घिसावट या खराबी नहीं देखी गई। ई20 पेट्रोल ने कोल्ड और हॉट स्टार्ट परीक्षण भी सफलतापूर्वक पास किए।

हालांकि मंत्रालय ने यह माना कि इथेनॉल की ऊर्जा घनता कम होने के कारण माइलेज में 1–2% (नए वाहनों में) और 3–6% (पुराने वाहनों में) की मामूली गिरावट हो सकती है। लेकिन यह अंतर तकनीकी रूप से स्वीकार्य है और उचित इंजन ट्यूनिंग से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। पुराने वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स को 20–30 हजार किमी बाद बदलना पड़ सकता है, जो एक सामान्य रखरखाव प्रक्रिया है।

सरकार ने बताया कि 2014–15 से अब तक इथेनॉल मिश्रण से देश को ₹1.40 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और किसानों को ₹1.20 लाख करोड़ का भुगतान इथेनॉल खरीद के माध्यम से किया गया है। निति आयोग के अनुसार, गन्ना आधारित इथेनॉल से जीवनचक्र उत्सर्जन में 65% और मक्का आधारित इथेनॉल से 50% की कमी आती है।

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