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Wednesday, February 18, 2026
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जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी!

जस्टिस वर्मा की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं। सिब्बल ने कहा, "यह पूरा मामला राजनीतिक रंग ले चुका है।"

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इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई शुरू हुई। जस्टिस वर्मा ने नकदी मिलने के मामले में गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की। इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने की।

जस्टिस वर्मा की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं। सिब्बल ने कहा, “यह पूरा मामला राजनीतिक रंग ले चुका है।”

उन्होंने तर्क दिया कि 22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी वीडियो और तस्वीरों के बाद देशभर में जस्टिस वर्मा को पहले ही दोषी मान लिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि घटनास्थल से मिला पैसा कहां गया और इसे जब्त क्यों नहीं किया गया।

सिब्बल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 124 (5) के तहत जजों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने स्पष्ट किया है कि बिना उचित प्रक्रिया के किसी जज के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकती।

उन्होंने यह भी कहा कि एससी के इन-हाउस जांच नियमों के अनुसार, जांच पूरी होने तक जज के आचरण पर सार्वजनिक चर्चा नहीं होनी चाहिए।

सिब्बल ने दलील दी कि जांच कमेटी ने जस्टिस वर्मा को अपना पक्ष रखने का उचित मौका नहीं दिया। कमेटी ने नकारात्मक निष्कर्ष निकाले और उनसे पूछा गया कि नकदी कहां से आई, जबकि सबूतों की जांच ठीक से नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कमेटी ने सीसीटीवी फुटेज जैसी महत्वपूर्ण सामग्री को नजरअंदाज किया और जस्टिस वर्मा के खिलाफ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया।

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने सिब्बल से सवाल किया, “अगर जस्टिस वर्मा को कमेटी की प्रक्रिया पर भरोसा नहीं था, तो वे इसके सामने पेश क्यों हुए?”

उन्होंने यह भी पूछा कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना की ओर से जांच रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजना क्यों गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति जजों की नियुक्ति का अधिकार रखते हैं।”

जस्टिस दत्ता ने कहा कि रिपोर्ट भेजने का मतलब यह नहीं कि सीजेआई संसद को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

सिब्बल ने जवाब दिया कि संसद में महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही मामला राजनीतिक होता है, लेकिन यहां जांच शुरू होने से पहले ही इसे सार्वजनिक और राजनीतिक बना दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 30 जुलाई को सुनवाई करेगी।

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