यहां मीडिया को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सुक्खू को जल्दबाजी में फैसले लेने की आदत पड़ गई है, जिसके चलते सरकार को बार-बार अपने कदम पीछे खींचने पड़ रहे हैं और राज्य हंसी का पात्र बन गया है।
सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह इस विवाद की मुख्य वजह सरकार का वह फैसला है, जिसके तहत डिप्टी कमिश्नरों को रोस्टर में पांच प्रतिशत तक बदलाव करने की अनुमति दी गई है। ठाकुर ने कहा कि ये नए नियम कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिए सत्ता का साफ-साफ दुरुपयोग हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराना नहीं, बल्कि उनमें देरी करना है और साथ ही यह भी जोड़ा कि सरकार मनमाने फैसले ले रही है और हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार शुरू से ही निष्पक्ष पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है। इसीलिए वह लगातार पंचायत चुनावों को रोकने की साजिश रच रही है।
भाजपा विधायक ने कहा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद भी मुख्यमंत्री पंचायत चुनावों में बाधा डालने के अपने इरादे से पीछे नहीं हट रहे हैं।
ठाकुर ने कहा कि पंचायत चुनाव प्रक्रिया के पहले ही दिन से, सरकार पंचायत चुनावों को रोकने की साजिश रच रही है। इसी मकसद से प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार, किसी न किसी तरीके से, राज्य चुनाव आयोग के आदेशों की अवहेलना करने के लिए उकसाया गया। चुनाव करवाने के बजाय, वे उन्हें रोकने के तरीके खोजने में लगे हुए थे।
विरोध प्रदर्शन के बाद भाजपा के विधायक सदन में शामिल हुए, जहां भाजपा सदस्य रणधीर शर्मा द्वारा नियम 67 के तहत लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की अपनी मांग को लेकर उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया।
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