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Monday, May 11, 2026
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इल्तिजा मुफ्ती का उमर पर हमला, बोलीं- भाजपा एजेंडा चला रहे मुख्यमंत्री!

पीडीपी नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि 'हम किसी को जबरदस्ती ड्रग्स देते हैं या शराब देते हैं', तो जम्मू-कश्मीर में नशा-मुक्ति अभियान के नाम पर जम्मू-कश्मीर में अनेक लोगों के घरों पर बुलडोजर चलता है।

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पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने शराब के सेवन और उर्दू भाषा विवाद पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला भाजपा के एजेंडे को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं और उसके साथ मिलकर खेल खेल रहे हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान पर इल्तिजा मुफ्ती ने आईएएनएस से कहा, “अफसोस की बात यह है कि हमारे मुख्यमंत्री हर बात पर यू-टर्न लेते हैं। वे सुबह एक बयान देते हैं और एक्सपोज हो जाते हैं तो शाम को दूसरा बयान देते हैं। उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर में एक ड्रग कल्चर प्रमोट कर रहे हैं।”

पीडीपी नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि ‘हम किसी को जबरदस्ती ड्रग्स देते हैं या शराब देते हैं’, तो जम्मू-कश्मीर में नशा-मुक्ति अभियान के नाम पर जम्मू-कश्मीर में अनेक लोगों के घरों पर बुलडोजर चलता है। मतलब वे भी उमर अब्दुल्ला को कह सकते हैं कि हमने किसी भी नौजवान से जबरदस्ती नहीं की, तो फिर क्यों बुलडोजर चला रहे हैं?

इल्तिजा मुफ्ती ने आगे कहा, “उमर अब्दुल्ला इसमें धर्म का एंगल लेकर आए हैं। कोई भी अपने धर्म में शराब और ड्रग्स को प्रमोट नहीं करेगा। हिंदू बाहुल्य राज्य गुजरात और बिहार में शराबबंदी लागू की गई। जम्मू-कश्मीर में मुसलमान अधिक संख्या में रहते हैं, जिसमें धर्म में शराब को हराम माना जाता है। उमर साहब कहते हैं कि ‘मैं शराब पर बैन नहीं लगाऊंगा’।”

उन्होंने सवाल किया कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास विधानसभा में बहुमत है, फिर क्यों सरकार राज्य में शराबबंदी नहीं करनी चाहती है।

उर्दू भाषा से जुड़े विवाद पर भी पीडीपी नेता ने कहा, “मुख्यमंत्री ने नौकरियों में उर्दू भाषा की अनिवार्यता को हटाने का एक आदेश निकाला। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह भाजपा के एजेंडे को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं और उसके साथ खेल रहे हैं चाहे वह वक्फ बिल हो या जैसा कि आप जानते हैं, उर्दू को हटाना और हमारी पहचान को मिटाना, हमें हमारी अपनी भाषा से वंचित करना। उर्दू जम्मू-कश्मीर में बहुत से लोगों की सामूहिक भाषा है। उमर अब्दुल्ला ने लोगों से जो वादा किया था, उन्हें वह नहीं दे रहे हैं।”

 
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