इस्लामिक आतंकवाद पर कांग्रेस का रुख हमेशा से ही पर्दा डालने का रहा है। दिल्ली में हुए आत्मघाती विस्फोट में मारे गए आतंकवादी उमर नबी का वीडियो सामने आने के बाद, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि वह एक भटका हुआ मुसलमान था। दिल्ली में हुए विस्फोट में 14 लोग मारे गए थे। इसमें एक मुसलमान की भी मौत हुई थी, कई घायल हुए थे। डॉ. उमर के वायरल हुए चौंकाने वाले वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए, मसूद ने कहा कि वह उमर के विचारों से सहमत नहीं हैं। इस्लाम निर्दोष लोगों की हत्या करना नहीं सिखाता।
उन्होंने कहा, “मैं सामने आए इस वीडियो से सहमत नहीं हूँ। कहा जा रहा है कि उसने आत्मघाती हमलों का समर्थन किया है। इस तरह की खुशी, इस तरह की हरकतें इस्लाम में बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। इस्लाम में यह हराम है।” उन्होंने आगे कहा, “आप निर्दोष लोगों की हत्या कर रहे हैं, और इस्लाम ऐसा नहीं सिखाता। ये सभी लोग भ्रमित हैं, और उनके कृत्य इस्लाम का असली चेहरा नहीं हैं।”
जो नया वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें कश्मीर के पुलवामा का आतंकी डॉक्टर उमर अंग्रेज़ी में बोलते नज़र आ रहा हैं। इसमें डॉक्टर कहते हुए दिखता हैं कि इसे आत्मघाती हमला कहना ग़लत है। उलटे, वह इसे शहादत से जोड़कर उसे मार्टीडम ऑपरेशन कहते हुए दिखता है। इस्लामी आतंकी इसे आत्मघाती बम विस्फोट की बजाय, इस्लाम में शहादत की अवधारणा कहता है।
भाजपा प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने मसूद के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मसूद “आतंकवाद का दुष्प्रचारक” बन गया है और आरोप लगाया कि ‘आतंकवादियों को बचाने वाला गिरोह’ फिर से सक्रिय हो गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली बम धमाकों का मास्टरमाइंड आत्मघाती हमले का समर्थन करते हुए वीडियो बनाता है और कांग्रेस सांसद उसे ‘भ्रमित युवक’ कहते हैं। यह पूरी व्यवस्था राष्ट्रहित से ज़्यादा वोट बैंक की राजनीति को महत्व देती है। मुफ़्ती, हुसैन दलवई, अबू आज़मी, इमरान मसूद आदि पर भी आरोप लगाए गए। आतंकवादियों का समर्थन।
पूर्व मंत्री मोहसिन रज़ा ने कांग्रेस पर ऐसे युवाओं को गलत रास्ते पर ले जाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस खुद भ्रमित है। उन्होंने कई पढ़े-लिखे लोगों को गलत रास्ते पर धकेला है। ऐसे बयानों से ऐसा लगता है कि वे आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं। यह उनका पुराना रूप है।”
जाँच अधिकारियों के अनुसार, 10 नवंबर का विस्फोट आकस्मिक होने की अधिक संभावना है। जाँच से पता चला है कि डॉ. उमर बड़े पैमाने पर आत्मघाती हमला करने की तैयारी कर रहे थे। आतंकी हमले में शामिल डॉक्टर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे। इस समूह में 9 से 10 सदस्य थे, जिनमें से 5-6 डॉक्टर थे। ये सभी फरीदाबाद स्थित अल-फ़लाह विश्वविद्यालय से जुड़े थे। डॉक्टर होने का फायदा उठाकर उन्होंने रसायन और विस्फोटक सामग्री हासिल की। 10 नवंबर का विस्फोट एक बेहद भीड़भाड़ वाले इलाके में हुआ था, जिसमें कम से कम 14 लोग मारे गए और 20 से ज़्यादा घायल हुए।
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