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भारत ने पाकिस्तान को दी कड़ी चेतावनी, कहा- कश्मीर पर अवैध कब्जा छोड़े और आतंकवाद को समर्थन देना बंद करे!

"पाकिस्तान द्वारा बार-बार कश्मीर का जिक्र करने से न तो उनके अवैध दावे वैध हो जाते हैं और न ही उनके राज्य-प्रायोजित आतंकवाद को कोई वैधानिकता मिलती है।"

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के अवैध कब्जे वाले हिस्से को तुरंत खाली करे और सीमा पार आतंकवाद को सही ठहराने की अपनी नीति को समाप्त करे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सोमवार को कहा, “पाकिस्तान द्वारा बार-बार कश्मीर का जिक्र करने से न तो उनके अवैध दावे वैध हो जाते हैं और न ही उनके राज्य-प्रायोजित आतंकवाद को कोई वैधानिकता मिलती है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के उस हिस्से पर अवैध कब्जा जमाए हुए है, जिसे उसे खाली करना चाहिए। “यह सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 के अनुरूप होगा, जो 21 अप्रैल 1948 को पारित हुआ था और जिसमें पाकिस्तान से अपनी सेनाओं और घुसपैठियों को कश्मीर से हटाने की मांग की गई थी।”

हरीश ने यह भी दोहराया कि “जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा।” उन्होंने पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह इस वैश्विक मंच का ध्यान भटकाने के लिए अपने विभाजनकारी एजेंडे को बढ़ावा न दे।

इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मामलों के कनिष्ठ मंत्री सैयद तारिक फातमी ने सुरक्षा परिषद में कहा कि संयुक्त राष्ट्र को कश्मीर में जनमत संग्रह कराने के अपने प्रस्ताव को लागू करना चाहिए।

हालांकि, भारत ने इस दावे को खारिज कर दिया और याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र का मूल प्रस्ताव पाकिस्तान पर यह अनिवार्य करता था कि वह पहले अपने सैनिकों और आतंकियों को कश्मीर से पूरी तरह हटाए। प्रस्ताव में साफ कहा गया था कि पाकिस्तान को “जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ रोकनी होगी और आतंकवादियों को किसी भी तरह की सामग्री या सैन्य सहायता देना बंद करना होगा।

भारत का यह भी कहना है कि अब जनमत संग्रह की कोई प्रासंगिकता नहीं रही, क्योंकि कश्मीर के लोगों ने भारत के प्रति अपनी निष्ठा बार-बार चुनावों के माध्यम से स्पष्ट कर दी है।

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फातमी ने संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) का जिक्र किया, जिसकी स्थापना 1949 में नियंत्रण रेखा पर युद्धविराम की निगरानी के लिए की गई थी। भारत इस संगठन को अप्रासंगिक मानता है, क्योंकि 1972 के शिमला समझौते के बाद भारत और पाकिस्तान ने तय किया था कि कश्मीर विवाद एक द्विपक्षीय मुद्दा रहेगा और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी।

भारत ने नई दिल्ली स्थित सरकारी इमारत से UNMOGIP को हटा दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि वह इसे अब मान्यता नहीं देता।

भारत के इस कड़े बयान से यह साफ हो गया है कि वह पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की किसी भी कोशिश को न केवल खारिज करता है, बल्कि उसे अपने अवैध कब्जे को समाप्त करने की भी नसीहत देता है।

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