उन्होंने कहा कि भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा और एक रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाएगा जो न केवल देश की जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि रक्षा निर्यात की क्षमता को भी मजबूत करेगा। सिंह ‘द वीक’ पत्रिका द्वारा आयोजित ‘डिफेंस कॉन्क्लेव 2025 – फोर्स ऑफ द फ्यूचर’ में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘वह दिन दूर नहीं जब भारत न केवल एक विकसित देश के रूप में उभरेगा, बल्कि हमारी सैन्य शक्ति भी दुनिया में नंबर एक बन जाएगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस वर्ष रक्षा उत्पादन 1.60 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाना चाहिए, जबकि हमारा लक्ष्य वर्ष 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये मूल्य के रक्षा उपकरण उत्पादन का है।’’
रक्षा मंत्री ने कहा कि जहां भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताएं राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता पर केंद्रित हैं, वहीं वे विनिर्माण को वैश्विक “आपूर्ति झटकों” से भी बचा रही हैं। उन्होंने घोषणा की, “हमारा रक्षा निर्यात इस वर्ष 30,000 करोड़ रुपये और वर्ष 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाना चाहिए।”
सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता का उद्देश्य संघर्ष को भड़काना नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी रक्षा क्षमताएं शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए एक विश्वसनीय निवारक की तरह हैं। शांति तभी संभव है जब हम मजबूत बने रहें।”
अपने संबोधन में, सिंह ने स्वदेशीकरण, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व पर ध्यान केंद्रित करते हुए रक्षा क्षेत्र में “आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार” भारत के लिए एक आकर्षक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भी अपनी स्थिति बना रहा है। सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र का पुनरुद्धार और सुदृढ़ीकरण सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।
उन्होंने कहा कि सरकार की पहली और सबसे बड़ी चुनौती इस मानसिकता को बदलना है कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल आयात करेगा।
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा, ‘‘आज, जबकि भारत का रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को लचीला बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।’’ उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम न केवल देश के रक्षा उत्पादन को मजबूत कर रहा है, बल्कि इसमें वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को लचीला और सुदृढ़ बनाने की क्षमता भी है।
युद्ध की बदलती प्रकृति पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में संघर्ष और युद्ध अधिक हिंसक और अप्रत्याशित होंगे। साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से नए युद्धक्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं और इसके साथ ही, पूरी दुनिया में कथानक और धारणा का युद्ध भी लड़ा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए समग्र क्षमता निर्माण और निरंतर सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सुधारों पर विचार करते हुए सिंह ने कहा कि 200 वर्ष से अधिक पुराने आयुध कारखानों का निगमीकरण एक “साहसिक लेकिन आवश्यक कदम” था।
उन्होंने कहा, “आज आयुध कारखाने अपने नए स्वरूप में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और लाभ कमाने वाली इकाइयाँ बन गए हैं। मेरा मानना है कि दो सौ साल से भी पुराने ढांचे को बदलना इस सदी का बहुत बड़ा सुधार है।”
रक्षा मंत्री ने सरकार के स्वदेशीकरण अभियान को रेखांकित किया तथा सशस्त्र बलों द्वारा पांच तथा रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) द्वारा पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां जारी किए जाने का उल्लेख किया।
रक्षा मंत्रालय ने सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की है, जिसमें सैन्य हार्डवेयर शामिल है, जिसका उत्पादन एक निश्चित समयावधि में देश के भीतर किया जाएगा। उन्होंने कहा, “सेवाओं की सूची में शामिल रक्षा उपकरणों, हथियार प्रणालियों और प्लेटफार्मों की कुल संख्या 509 है। इनका उत्पादन अब भारत में किया जाएगा।”
सिंह ने कहा, “इसी प्रकार, डीपीएसयू (रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम) सूची में शामिल वस्तुओं की कुल संख्या 5,012 है, जिसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लाइन रिप्लेसमेंट इकाइयां, उप-प्रणालियां, स्पेयर और घटक शामिल हैं।”
रक्षा मंत्री ने रक्षा बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा घरेलू कंपनियों से खरीद के लिए आरक्षित करने के सरकार के निर्णय पर भी प्रकाश डाला।
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