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वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल ठीक नहीं : ज्ञानेश कुमार!

ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट करते हुए कहा, "रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा परिणाम घोषित होने के बाद 45 दिनों के भीतर राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकते हैं।

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विपक्ष के मतदाता सूची में त्रुटियों और दोहरे मतदान के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर मतदाता द्वारा उम्मीदवार चुनने के 45 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर नहीं की जाती, तो ‘वोट चोरी’ जैसे भ्रामक शब्दों का उपयोग कर जनता को गुमराह करने की कोशिश संविधान का अपमान है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “कानून के अनुसार, अगर समय रहते मतदाता सूचियों की त्रुटियों को समय पर ठीक नहीं किया जाता और मतदाता द्वारा उम्मीदवार चुनने के 45 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर नहीं की जाती, तो ‘वोट चोरी’ जैसे गलत शब्दों का इस्तेमाल करना भारत के संविधान का अपमान नहीं, तो और क्या है?”

उन्होंने यह भी बताया कि जहां तक मशीन-पठनीय मतदाता सूची का सवाल है, सर्वोच्च न्यायालय ने 2019 में ही कहा था कि यह मतदाता की निजता का उल्लंघन हो सकता है।

ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट करते हुए कहा, “रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा परिणाम घोषित होने के बाद 45 दिनों के भीतर राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकते हैं।

इस अवधि के बाद केरल, कर्नाटक या बिहार में बेबुनियाद आरोप लगाना गलत है। अगर इस दौरान कोई अनियमितता नहीं पाई जाती, तो इतने समय बाद ऐसे आरोपों के पीछे की मंशा देश के मतदाता और जनता समझती है।”

बिहार एसआईआर की बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची में त्रुटियों के दावों और आपत्तियों के लिए 1 अगस्त से 1 सितंबर तक का समय निर्धारित है।

अभी भी 15 दिन का समय बाकी है और चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों, उनके नामित बूथ स्तरीय एजेंटों, राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों तथा राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से अपील करता है कि आने वाले 15 दिनों के भीतर यदि उन्हें उपलब्ध कराई गई मतदाता सूची के प्रारूप में कोई त्रुटि है, तो वे उसे निर्धारित प्रपत्रों में प्रस्तुत करें। चुनाव आयोग के दरवाजे सभी के लिए खुले हुए हैं।”

ज्ञानेश कुमार ने कहा, “कुछ मतदाताओं ने दोहरे मतदान के आरोप लगाए हैं। हालांकि, जब सबूत मांगे गए, तो कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसे झूठे आरोप से न तो चुनाव आयोग डरता है और न ही कोई मतदाता डरता है।”

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