महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन और तेज हो गया है। एक ओर मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में अपने समर्थकों के साथ डटे हुए हैं, तो दूसरी ओर राज्य के मंत्री और वरिष्ठ राकांपा नेता छगन भुजबल ने चेतावनी दी है कि अगर मराठों को आरक्षण देने के लिए ओबीसी कोटे में कोई भी कटौती की गई, तो ओबीसी समाज सड़कों पर उतर जाएगा।
भुजबल ने कहा कि ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण मिला है, जिसमें से खानाबदोश और गोवारी समेत कई समुदायों का हिस्सा तय है। ऐसे में 374 समुदायों को वास्तविक तौर पर केवल 17 प्रतिशत आरक्षण मिल पाता है। उन्होंने साफ कहा कि मराठों को ओबीसी कोटे से आरक्षण नहीं मिलना चाहिए, लेकिन अगर सरकार उन्हें अलग से आरक्षण देती है तो आपत्ति नहीं होगी।
उधर, मनोज जरांगे ने सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस पर गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आजाद मैदान नहीं छोड़ेंगे।
उनकी मांग है कि मराठों को कुनबी जाति का प्रमाण पत्र देकर आरक्षण दिया जाए, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएं और आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। जरांगे ने कहा कि अगर सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करने या आंदोलन खत्म करने की कोशिश की तो नतीजे गंभीर होंगे।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया था कि प्रदर्शनकारियों को दो सितंबर की शाम तक आजाद मैदान और सड़कों को खाली करना होगा। इसके बाद मुंबई पुलिस ने जरांगे और उनकी टीम को नोटिस जारी किया है। वहीं, जरांगे ने साफ कहा है कि वे सरकार से बातचीत को तैयार हैं लेकिन बिना मांगे पूरी हुए मैदान नहीं छोड़ेंगे।
राजनीतिक हलकों में यह मामला गरमा गया है। विपक्ष ने फडनवीस सरकार पर आंदोलन को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हर हाल में किया जाएगा।
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