बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीएम शिवकुमार ने कहा कि देश एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है और बार-बार परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों के कारण छात्र असमंजस की स्थिति में हैं।
उन्होंने कहा, “आज देश एक चौराहे पर खड़ा है। छात्र और युवा दुविधा में हैं। 100 से ज्यादा बार पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। प्रधानमंत्री ने आज इस मुद्दे पर बात की, लेकिन उन्हें शुरुआत में ही बोलना चाहिए था।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के छात्र अपनी प्रतिभा के लिए दुनिया भर में पहचाने जाते हैं और देश के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि हर सरकार की जिम्मेदारी है कि परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से कराई जाएं और छात्रों को अच्छी शिक्षा मिले।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर शिवकुमार ने कहा कि किसी को भी बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “किसी को बचाने का सवाल ही नहीं है। सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”
शिवकुमार ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतंत्र में सभी का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और इस कथित कार्रवाई के वीडियो भी सामने आए, जबकि उन्हें रोकने की कोशिश की गई।
उन्होंने मीडिया के एक वर्ग की भी आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि छात्रों के प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई को पर्याप्त महत्व क्यों नहीं दिया गया।
बुधवार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) कार्यालय के पास कर्नाटक भाजपा विधायक बीपी हरीश पर हुए कथित हमले के बारे में पूछे जाने पर शिवकुमार ने कहा कि वह इस घटना का समर्थन नहीं करते, लेकिन लोगों को इसे व्यापक संदर्भ में देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गृह मंत्री इस मामले में उचित कार्रवाई करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को भी अतीत की उन घटनाओं को याद रखना चाहिए, जिनमें झड़पों के दौरान कथित तौर पर हथियार बरामद हुए थे।



