कर्नाटक के बीजेपी के निलंबित विधायक बसनगौडा (बसवराज) पाटिल यतनाल ने एक धार्मिक समारोह में दिए गए बयान में कहा कि अगर उन्हें लोगों का आशीर्वाद मिला और वे मुख्यमंत्री बने तो वे पुलिस को AK-47 राइफल देने और हिन्दू-विरोधी कृत्यों पर गोली चलाने का आदेश देने तक की बात कहेंगे, जिससे राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीव्र विवाद खड़ा हो गया है।
यत्नाळ ने श्री सिद्धेश्वर मिल परिसर के बन्नी महाकाली-देवी कार्यक्रम के दौरान यह टिप्पणी करते हुए कहा कि हिन्दुओं के मंदिर, शोभायात्राओं और घरों पर पथराव जैसी घटनाओं का कोई संरक्षण नहीं हो रहा है और ऐसे मामलों में कड़ा रुख होना चाहिए| उनके इस तरह के कड़े और उकसावे भरे लहजे पर विपक्ष और नागरिक समाज ने चिंता जताई है।
भाजपा के केंद्रीय अनुशासन कमेटी ने उनके अनुशासनभंग और बार-बार विरोधाभासी बयानों को कारण बनाकर उन्हें छह वर्षों के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। पार्टी का कहना था कि यतनाल के बयान और कार्रवाई ने संगठन के नेतृत्व और अनुशासन को चुनौती दी है। यतनाल ने इस फैसले के बाद भी पार्टी नेतृत्व पर परिवारवादी राजनीति और अन्य आरोप लगाए हैं और अपनी नीतिगत मजबूरियों का बचाव किया है।
विश्लेषक मानते हैं कि ऐसे बयान सामाजिक समरसता के लिए खतरनाक हैं और कानून का राज्य सुनिश्चित करने के नाम पर किसी भी तरह की असंवैधानिक हिंसा की वकालत अनिर्दिष्ट और चिंताजनक है। राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी रहती है कि वे कठोर बयानों से दूरी बनाएं और मामलों को शांति व कानून के दायरे में हल करने का संदेश दें।
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