राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम निर्णय में केंद्र सरकार ने ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, “यूनियन कैबिनेट से मंज़ूरी मिलने के बाद, भारत के राष्ट्रपति केरल (नाम में बदलाव) बिल, 2026 नाम के एक बिल को, भारत के संविधान के आर्टिकल 3 के प्रोविज़ो के तहत अपनी राय बताने के लिए केरल की स्टेट लेजिस्लेटिव असेंबली को भेजेंगे।”
उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद केंद्र आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा और संसद में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ पेश करने के लिए राष्ट्रपति की अनुशंसा ली जाएगी, ताकि संविधान की पहली अनुसूची में दर्ज ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ किया जा सके।
केरल विधान सभा ने 25 जून 2024 को दूसरी बार यह प्रस्ताव पारित किया था। इससे पहले पारित प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी संशोधनों के सुझाव के साथ वापस भेज दिया था। संशोधित प्रस्ताव को दोबारा पारित करते हुए राज्य ने सभी भाषाओं (जो संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हैं) में ‘केरल’ की जगह ‘केरलम’ नाम लागू करने की मांग की थी।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 2024 में यह प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने ने कहा था कि राज्य को मलयालम में ‘केरलम’ कहा जाता है और स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही मलयालम भाषी क्षेत्रों के एकीकरण की मांग इसी नाम के साथ जुड़ी रही है। उन्होंने विधानसभा में कहा था, “लेकिन हमारे राज्य का नाम संविधान के पहले शेड्यूल में केरल लिखा है। यह असेंबली केंद्र से रिक्वेस्ट करती है कि वह संविधान के आर्टिकल 3 के तहत इसे ‘केरलम’ में बदलने के लिए तुरंत कदम उठाए और संविधान के आठवें शेड्यूल में बताई गई सभी भाषाओं में इसका नाम बदलकर ‘केरलम’ कर दे।”
केरल में 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव मई से पहले होने की संभावना है, हालांकि भारत निर्वाचन आयोग ने अभी तक आधिकारिक तिथियों की घोषणा नहीं की है। ऐसे में नाम परिवर्तन का यह निर्णय राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि यह कैबिनेट बैठक प्रधानमंत्री के नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित की गई, जो वहां की पहली बैठक थी। इससे पहले 13 फरवरी को दक्षिण ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठक हुई थी। यदि विधायी प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो ‘केरलम’ नाम केंद्र सरकार के सभी आधिकारिक दस्तावेजों और संचार में लागू हो जाएगा, जिससे राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को औपचारिक मान्यता मिल सकेगी।
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