केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ हो रहे विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार देते हुए कहा कि विरोध करने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर भ्रामक प्रचार किया था। रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,”जब सीएए लागू हुआ, तब लोगों को डराया गया कि मुसलमानों को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। अब एक साल हो गया, क्या किसी मुसलमान को निकाला गया?”
रिजिजू ने जोर देकर कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं। कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि इससे मस्जिदों, कब्रिस्तानों और मुसलमानों की संपत्तियों पर कब्जा हो जाएगा, जो कि पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि वक्फ कानून 1913 से अस्तित्व में है और समय-समय पर इसमें संशोधन किए गए हैं, जिनमें 1954, 1995 और 2013 के बदलाव शामिल हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया,”भारत का संविधान किसी भी व्यक्ति की संपत्ति छीनने की इजाजत नहीं देता। जो लोग इस विधेयक को गैरसंवैधानिक बता रहे हैं, वे पहले साबित करें कि यह कहां गलत है।” रिजिजू ने कहा कि राजनीतिक दलों और कुछ समूहों द्वारा जानबूझकर गुमराह करने वाली बातें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने चेताया कि ऐसे झूठे दावों से समाज में अशांति फैल सकती है।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “जब सीएए आया, तब भी इन्हीं लोगों ने डर फैलाया था। एक साल बाद भी किसी मुसलमान का हक नहीं छीना गया। अब वही लोग वक्फ विधेयक पर झूठ फैला रहे हैं।”
रिजिजू ने बताया कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को अब तक 97 लाख से अधिक सुझाव और मेमोरेंडम मिले हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक पर संसद में खुली बहस होगी, जहां सभी पार्टियों के प्रतिनिधि अपने विचार रख सकते हैं। उन्होंने अपील के साथ कहा की,”अगर किसी को आपत्ति है, तो संसद में तर्कपूर्ण चर्चा करें, न कि झूठ फैलाएं।”
रिजिजू ने ईद के मौके पर समाज से सत्य बोलने और झूठ से बचने की अपील की। उन्होंने कहा, “ईद के दिन भी अगर कोई झूठ फैलाता है, तो वह नकली है। हमें सच्चाई के साथ खड़ा रहना चाहिए और देश की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए।” सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वक्फ संशोधन विधेयक पर पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी, और समाज को गुमराह करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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