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Tuesday, October 27, 2026
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जौहर यूनिवर्सिटी पर मदनी बोले, इमारतें गिराना छात्रों के हित में नहीं!

अगर विश्वविद्यालय में कोई अनियमितता है तो कानून के तहत जुर्माना लगाया जाए, लेकिन बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त करना समाधान नहीं है।  

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने देश के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि नफरत की सियासत देश को कमजोर कर रही है। उन्होंने रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी पर हो रही कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि अगर विश्वविद्यालय में कोई अनियमितता है तो कानून के तहत जुर्माना लगाया जाए, लेकिन बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त करना समाधान नहीं है।

उन्होंने वन नेशन-वन इलेक्शन को भी राजनीतिक मुद्दा बताया और ज्ञानवापी विवाद के समाधान के लिए अदालत से अंतिम फैसला देने की बात कही।

लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने के बाद मीडिया से बातचीत में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है।

इस आग को प्यार और मोहब्बत से ही बुझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फिरकापरस्ती की आवाज को मिलकर दबाना होगा और पूरे देश को एकजुट होकर तरक्की के लिए काम करना चाहिए।

जौहर यूनिवर्सिटी पर चल रही कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहा कि यह एक राजनीतिक मामला बना दिया गया है। आजम खान भले ही राजनीतिक व्यक्ति हों, लेकिन जिस मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर विश्वविद्यालय है, उनका देश और समाज के लिए बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय को ध्वस्त करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय में कोई कानूनी खामी है तो सरकार जुर्माना लगाए या कानून के मुताबिक कार्रवाई करे, लेकिन हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इमारतों को गिराना उचित नहीं है।

ज्ञानवापी विवाद पर मदनी ने कहा कि यदि आपसी बातचीत से समाधान नहीं निकल रहा है तो अदालत को इस मामले का अंतिम निस्तारण कर देना चाहिए।

वहीं, वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर उन्होंने इसे भी राजनीतिक एजेंडा करार दिया। मदनी ने कहा कि देश में हिंदू-मुस्लिम के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिश हो रही है, जबकि सभी धर्म प्रेम और इंसानियत का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि ‘अल्लाहु अकबर’ का अर्थ अल्लाह सबसे बड़ा है और दूसरी ओर लोग ‘ॐ’ को सर्वोच्च मानते हैं। आस्था का सम्मान सभी को करना चाहिए और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस्लाम कत्ल या नफरत नहीं, बल्कि मोहब्बत का संदेश देता है। लोगों को कुरान पढ़नी चाहिए और समझना चाहिए कि उसमें कहीं भी हिंसा या नफरत का संदेश नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इसी कारण दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग इस्लाम की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

पेपर लीक के मुद्दे पर मदनी ने कहा कि छात्रों का भविष्य सबसे बड़ी प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए।

वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के अनुसार आचरण करने का अधिकार देता है और उसी संवैधानिक भावना का सम्मान किया जाना चाहिए।

मदनी ने कहा कि वह और उनकी संस्था चुनावी राजनीति नहीं करती। उनका उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है। उन्होंने कहा, “हम रहें या न रहें, लेकिन प्यार और मोहब्बत का पैगाम आगे बढ़ना चाहिए।

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