उन्होंने वन नेशन-वन इलेक्शन को भी राजनीतिक मुद्दा बताया और ज्ञानवापी विवाद के समाधान के लिए अदालत से अंतिम फैसला देने की बात कही।
लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने के बाद मीडिया से बातचीत में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है।
जौहर यूनिवर्सिटी पर चल रही कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहा कि यह एक राजनीतिक मामला बना दिया गया है। आजम खान भले ही राजनीतिक व्यक्ति हों, लेकिन जिस मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर विश्वविद्यालय है, उनका देश और समाज के लिए बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय को ध्वस्त करना उचित नहीं है।
ज्ञानवापी विवाद पर मदनी ने कहा कि यदि आपसी बातचीत से समाधान नहीं निकल रहा है तो अदालत को इस मामले का अंतिम निस्तारण कर देना चाहिए।
वहीं, वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर उन्होंने इसे भी राजनीतिक एजेंडा करार दिया। मदनी ने कहा कि देश में हिंदू-मुस्लिम के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिश हो रही है, जबकि सभी धर्म प्रेम और इंसानियत का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि ‘अल्लाहु अकबर’ का अर्थ अल्लाह सबसे बड़ा है और दूसरी ओर लोग ‘ॐ’ को सर्वोच्च मानते हैं। आस्था का सम्मान सभी को करना चाहिए और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस्लाम कत्ल या नफरत नहीं, बल्कि मोहब्बत का संदेश देता है। लोगों को कुरान पढ़नी चाहिए और समझना चाहिए कि उसमें कहीं भी हिंसा या नफरत का संदेश नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इसी कारण दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग इस्लाम की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
पेपर लीक के मुद्दे पर मदनी ने कहा कि छात्रों का भविष्य सबसे बड़ी प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए।
मदनी ने कहा कि वह और उनकी संस्था चुनावी राजनीति नहीं करती। उनका उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है। उन्होंने कहा, “हम रहें या न रहें, लेकिन प्यार और मोहब्बत का पैगाम आगे बढ़ना चाहिए।
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