मद्रास हाईकोर्ट: अभिनेता से राजनेता बने विजय पर ₹1.5 करोड़ का टैक्स जुर्माना बरक़रार

मद्रास हाईकोर्ट: अभिनेता से राजनेता बने विजय पर ₹1.5 करोड़ का टैक्स जुर्माना बरक़रार

Madras High Court: Tax penalty of ₹1.5 crore upheld against actor-turned-politician Vijay.

अभिनेता से राजनेता बने और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख विजय को मद्रास हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने वर्ष 2015–16 से संबंधित कथित अघोषित आय के मामले में आयकर विभाग द्वारा लगाए गए ₹1.5 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखते हुए उनकी रिट याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि आयकर विभाग की ओर से जारी नोटिस निर्धारित समय-सीमा के भीतर था, इसलिए जुर्माने को चुनौती देने का आधार इस स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।

यह मामला 2015–16 के दौरान कथित तौर पर ₹15 करोड़ की अतिरिक्त आय के खुलासे से जुड़ा है, जिसे आयकर विभाग के अनुसार ठीक से घोषित नहीं किया गया था। सितंबर 2015 में विजय के आवास पर हुई आयकर छापेमारी के बाद यह मामला सामने आया था। इसके आधार पर दिसंबर 2017 में आकलन आदेश पारित किया गया और दिसंबर 2018 में आयकर अधिनियम की धारा 271AAB(1) के तहत जुर्माना कार्यवाही शुरू की गई।

विजय ने 2022 में मद्रास हाईकोर्ट का रुख करते हुए जुर्माना आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति ने पिछले महीने आदेश सुरक्षित रखने के बाद शुक्रवार (6 फरवरी) को फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि आयकर विभाग द्वारा धारा 263 के तहत जारी कारण बताओ नोटिस वैधानिक समय-सीमा के भीतर था और इसमें किसी प्रकार की प्रक्रियागत त्रुटि नहीं पाई गई। इस निष्कर्ष के बाद अदालत ने मामले के अन्य पहलुओं की जांच से परहेज किया।

हालांकि, याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने विजय को यह छूट दी कि वे समय-सीमा के अलावा अन्य आधारों पर आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के समक्ष नोटिस और जुर्माना आदेश को चुनौती दे सकते हैं। मामले का इतिहास देखें तो सितंबर 2015 की तलाशी के बाद दिसंबर 2017 में आकलन आदेश पारित हुआ था। इसके खिलाफ विजय ने आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष चुनौती दी, जहां उन्हें आंशिक राहत मिली। बाद में विभाग ITAT गया, जिसने भी कुछ बिंदुओं पर विभाग के रुख को सही ठहराया, जिनमें विजय की फैन एसोसिएशन से जुड़े कुछ खर्च शामिल थे।

इसी दौरान ₹15 करोड़ की आय के सरेंडर से जुड़े जुर्माना प्रकरण समानांतर रूप से चलता रहा। जुलाई 2019 में विभाग ने धारा 263 के तहत पुनरीक्षण नोटिस जारी किया, यह तर्क देते हुए कि जुर्माना कार्यवाही सही तरीके से शुरू नहीं की गई थी। हालांकि, मई 2022 में ITAT ने इस पुनरीक्षण को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि जब जुर्माना कार्यवाही पहले से लंबित है, तो आगे की कार्रवाई की जरूरत नहीं है।

हाईकोर्ट में मामला पहुंचने पर जांच का दायरा इस सवाल तक सीमित कर दिया गया कि क्या अंतिम जुर्माना आदेश आयकर अधिनियम की धारा 275 के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर पारित हुआ था। अंतरिम स्तर पर एक अन्य पीठ ने जुर्माने की वसूली पर रोक लगाई थी, यह मानते हुए कि प्रथम दृष्टया आदेश समय-सीमा से बाहर प्रतीत होता है।

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