विधानसभा में छलका महाना का दर्द, कल की घटना से आहत!

उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में विधानसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने के लिए किए गए उनके प्रयासों पर अब उन्हें आत्ममंथन करना पड़ेगा।

विधानसभा में छलका महाना का दर्द, कल की घटना से आहत!

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उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन का माहौल उस समय भावुक हो गया, जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मंगलवार को हुए हंगामे का जिक्र करते हुए कहा कि वह भीतर से बेहद आहत हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में विधानसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने के लिए किए गए उनके प्रयासों पर अब उन्हें आत्ममंथन करना पड़ेगा। यहां तक कि उन्हें इस बात पर भी विचार करना होगा कि क्या वह इस पद के योग्य हैं।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सतीश महाना ने कहा कि मंगलवार की घटना ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें लगा कि या तो सदन के संचालन में उनके प्रयासों में कहीं कमी रह गई या फिर डॉ. भीमराव अंबेडकर का यह कथन सही है कि संविधान में नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्तियों में कमी होती है।

उन्होंने कहा कि उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक यात्रा अब अंतिम चरण में है। ऐसे में उन्हें गंभीरता से यह विचार करना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में पिछले साढ़े चार वर्षों में जो कुछ किया, वह सही था या नहीं।

उन्होंने कहा, “मैं इस बात पर भी आत्मचिंतन करूंगा कि क्या मैं इस कुर्सी के योग्य हूं। जल्द ही इस संबंध में निर्णय लूंगा।” सतीश महाना ने कहा कि विधानसभा और जनप्रतिनिधियों की सकारात्मक छवि बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए।

लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार की आलोचना और जनहित के मुद्दे उठाने की होती है, न कि सदन की गरिमा को प्रभावित करने की। अब तक विपक्ष ने अपनी बात रखने की लोकतांत्रिक परंपरा का पालन किया, लेकिन मंगलवार का घटनाक्रम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस सदस्य को वह अनुकरणीय मानते थे, उसी के व्यवहार ने उन्हें सबसे अधिक आहत किया। साथ ही उन्होंने सदन के भीतर की तस्वीरें बाहर जाने पर भी नाराजगी जताते हुए इसे विधानसभा की परंपराओं के विपरीत बताया।

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने विधानसभा अध्यक्ष से सपा विधायक सचिन यादव के निलंबन पर पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी नियम के तहत चर्चा की अनुमति दे दी जाती तो स्थिति सामान्य हो सकती थी। वहीं सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने कहा कि विपक्ष किसानों और छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाना चाहता है तथा उसे अध्यक्ष की निष्पक्षता और संरक्षण पर भरोसा है।

इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने जवाब में कहा कि वह विपक्ष की बात सुनने के लिए पूरी तरह तैयार थे और कई बार अवसर भी दिया गया, लेकिन हंगामे के कारण पूरा दिन व्यर्थ चला गया। सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की समान जिम्मेदारी है।

उधर, वित्त व संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा अध्यक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक सदन का संचालन अत्यंत कुशलता से किया है। पूरे सदन को अध्यक्ष की निष्पक्ष कार्यशैली पर विश्वास है और शेष कार्यवाही भी संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप चलेगी।

 
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