ज्ञात हो कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया था। उन्होंने कहा था कि हमें नफरत नहीं सद्भाव चाहिए। यह वक्फ संशोधन बिल इसलिए लाया गया क्योंकि आपको जमीन हड़पनी है।
बता दें कि आठ अप्रैल को शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने वक्फ संशोधन बिल को लेकर उद्धव ठाकरे की पार्टी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल का विरोध कर ठाकरे गुट ने सरकार का साथ नहीं दिया, बल्कि कांग्रेस और एनडीए विरोधी दलों के साथ मिलकर इसका विरोध किया था।
उन्होंने कहा था कि अब उद्धव ठाकरे गुट की पार्टी कह रही है कि वह कांग्रेस के साथ नहीं है, जिससे उनकी स्थिति भ्रमित नजर आती है। उद्धव ठाकरे की पार्टी खुद भ्रम में है और जनता को भी गुमराह करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र की जनता अब जागरूक और समझदार हो चुकी है।
बता दें कि वक्फ संशोधन कानून को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच महाराष्ट्र के मालेगांव स्थित मस्जिद में बुधवार को बैठक हुई। यह बैठक ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की तरफ से बुलाई गई थी, जिसमें मुस्लिम मौलानाओं ने हिस्सा लिया और इस कानून का जोरदार विरोध किया। बैठक में शिरकत करने वालों ने कहा कि हम इस तरह के किसी भी कानून को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते हैं, जिससे वक्फ की संपत्ति को नुकसान पहुंचे।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव मौलाना उमरैन महफूज रहमानी ने इस बैठक के बारे में पूरी जानकारी दी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था कि वक्फ संशोधन कानून से वक्फ की संपत्ति को खतरा है। हमारी सरकार से मांग है कि इसे वापस लिया जाए। हम इस तरह के कानून को मौजूदा समय में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते हैं।
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