महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया है, लेकिन इस बार सत्तारूढ़ महायुति सरकार खुद को रक्षात्मक मुद्रा में पा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार पर विपक्ष का जबरदस्त हमला तय माना जा रहा है। विपक्ष हिंदी थोपे जाने, किसानों के विरोध, और आधारभूत ढांचे की विफलताओं जैसे कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने सरकार पर सांस्कृतिक थोपाव का आरोप लगाते हुए ऐलान किया है कि वे सदन के भीतर और बाहर आक्रामक प्रदर्शन करेंगे। सरकार ने पहली कक्षा से तीसरी भाषा के रूप में हिंदी अनिवार्य करने का निर्णय लिया था, जिसे भारी विरोध के बाद वापस लेना पड़ा। इसके बावजूद, विपक्ष इसे मराठी अस्मिता के खिलाफ हमला बता रहा है।
20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे को लेकर कोल्हापुर और सांगली में स्थानीय किसानों में भारी नाराज़गी है। किसानों और यहां तक कि कुछ सत्ताधारी विधायकों का आरोप है कि उनकी जमीनें बिना सहमति के अधिग्रहित की जा रही हैं। विपक्ष इस परियोजना की आवश्यकता और कार्यान्वयन दोनों पर सवाल उठाने को तैयार है।
मुंबई और पुणे में हाल की बेमौसम बारिश और बाढ़ के चलते कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। खासकर पुणे के तलेगांव में इंद्रायणी नदी पर बना पुल ढह गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। विपक्ष सरकार पर आपदा प्रबंधन में विफल रहने का आरोप लगा रहा है।
धुले जिले में विधानसभा की एस्टिमेट्स कमिटी के दौरे में करोड़ों की अनियमित संपत्तियों के खुलासे ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वहीं, कक्षा 11 की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में तकनीकी खामियों और अव्यवस्था से छात्र और अभिभावक परेशान हैं।
पुणे में वैष्णवी हगवणे की आत्महत्या ने शादीशुदा महिलाओं पर ससुराल पक्ष द्वारा बनाए जा रहे मानसिक दबाव और समाज में मौजूद मानसिक स्वास्थ्य संकट को फिर से सामने ला दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को महिला कल्याण और सुरक्षा के सवाल के रूप में उठाने जा रहा है।
‘माझी लाडकी बहिन’ जैसी कल्याणकारी योजनाओं की राशि सामाजिक न्याय और आदिवासी विकास विभागों से हटाकर कहीं और खर्च किए जाने की कथित खबरों पर भी विपक्ष हमलावर है। माना जा रहा है कि विपक्ष इस कथित वित्तीय फेरबदल पर सरकार से जवाब मांगेगा।
मौजूदा सत्र में केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि खुद महायुति के कई विधायक भी सार्वजनिक रूप से नाराजगी जता चुके हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार इस सत्र में किस तरह विपक्षी आक्रमण और अंदरूनी असंतोष से निपटते हैं। यह मानसून सत्र सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी तूफानी साबित होने जा रहा है।
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