राऊत ने यह भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एक समय नागपुर में विदर्भ मेरा अपना राज्य है, जैसे बैनर लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। राऊत ने कहा कि अगर उद्धव और राज ठाकरे की एकता बनी नहीं रही, तो मुंबई अडानी-लोढ़ा के हाथों चली जाएगी, और एक दिन वह महाराष्ट्र का हिस्सा भी नहीं रह जाएगी।
राऊत ने लिखा कि ठाकरे भाइयों का साथ आना मराठी जनता के लिए आशा की किरण है, लेकिन यह सिर्फ एक शुरुआत है। उन्होंने कहा, “अब तक दोनों दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह ज़रूरी है कि गठबंधन हो। तभी महाराष्ट्र को सही दिशा मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि जो लोग ये सोचते हैं कि ठाकरे दबाव में आ जाएंगे, वे मुगालते में हैं। राऊत ने यह भी कहा कि मराठी जनता को सबसे पहले मुंबई और ठाणे को बचाने की लड़ाई लड़नी होगी, क्योंकि आने वाले समय में यहां नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं।
गौरतलब है कि बीते पांच जुलाई को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लगभग 20 साल बाद एक मंच पर नजर आए, जब राज्य सरकार ने कक्षा एक से हिंदी थोपने के दो सरकारी आदेश वापस लिए। इस मौके पर उद्धव ने कहा था कि हम साथ आए हैं और साथ ही रहेंगे, जिससे दोनों भाइयों की नज़दीकियों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
“‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘समाजवाद’ की झूठी बैसाखियों से सत्ता में लौटना चाहती है कांग्रेस”



