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Friday, April 17, 2026
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लाल किला विस्फोट मामलें में जम्मू-कश्मीर SIA ने दायर की चार्जशीट

‘डॉक्टर मॉड्यूल’ पर बड़े आतंकी नेटवर्क के आरोप

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दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए विस्फोट मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जम्मू और कश्मीर राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने 16 अप्रैल को यह चार्जशीट पेश की, जिसमें कथित ‘डॉक्टर टेरर मॉड्यूल’ की भूमिका का विस्तृत विवरण दिया गया है।

मामला 19 अक्टूबर को श्रीनगर के नौगाम इलाके में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) द्वारा धमकी भरे पोस्टर लगाने के बाद उजागर हुआ था। इन पोस्टरों का उद्देश्य आम जनता में भय फैलाना और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करना बताया गया है।

चार्जशीट में आरिफ निसार डार, यासिर उल अशरफ भट, मकसूद अहमद डार, इरफान अहमद वागे (उर्फ ओवैस), जमीर अहमद अहंगर (उर्फ मुतलाशी), मुजमिल शकील गनई (उर्फ मुसैब), डॉ. आदिल अहमद राथर (उर्फ जावेद), डॉ. शाहीन सईद, तुफैल अहमद भट और डॉ. उमर उन नबी शामिल हैं। इनमें से डॉ. उमर उन नबी को लाल किला हमले का आत्मघाती हमलावर बताया गया है।

जांच में सामने आया है कि यह मॉड्यूल प्रतिबंधित संगठन अंसार-गज़वात-उल-हिंदू (AGUH) को दोबारा सक्रिय करने की साजिश में जुटा था। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने एक गुप्त नेटवर्क तैयार किया, जो भर्ती, कट्टरपंथीकरण और देशभर में आतंकी हमलों की तैयारी में लगा हुआ था। एजेंसी का कहना है कि इस समूह ने JeM का नाम इस्तेमाल किया, ताकि उसकी बदनाम पहचान का फायदा उठाकर सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके और अपनी वास्तविक योजना को छिपाया जा सके।

जांच में यह भी सामने आया कि इस मॉड्यूल में उच्च शिक्षित लोग, विशेष रूप से चिकित्सा पेशे से जुड़े व्यक्ति शामिल थे, जिन्होंने अपने ज्ञान और संस्थागत संसाधनों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोप है कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस्लामी कट्टरपंथ का प्रचार कर रहे थे और विस्फोटक तैयार करने से संबंधित गतिविधियों में लगे थे।

SIA के अनुसार, आरोपियों ने ट्रायएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड (TATP) जैसे अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक विस्फोटक का उपयोग करने की योजना बनाई थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई आतंकी घटनाओं में इस्तेमाल किया गया है। जांच में बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और उससे जुड़े उपकरण बरामद किए गए हैं, जिससे इस साजिश के बड़े पैमाने और संभावित खतरे का अंदाजा लगाया गया।

एजेंसी ने दावा किया है कि साक्ष्य-आधारित जांच के जरिए पूरे आतंकी नेटवर्क और उसके समर्थन तंत्र को ध्वस्त कर दिया गया है। इसमें डिजिटल फॉरेंसिक, वैज्ञानिक विश्लेषण और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

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