30.6 C
Mumbai
Wednesday, June 3, 2026
होमन्यूज़ अपडेटफर्जी हस्ताक्षर विवाद से तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी बगावत, पार्टी में हो...

फर्जी हस्ताक्षर विवाद से तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी बगावत, पार्टी में हो सकती है टूट

नेता प्रतिपक्ष चयन पर उठे सवालों के बाद दो विधायकों का निष्कासन, गुप्त बैठकों और विधायकों की अनुपस्थिति ने बढ़ाई ममता बनर्जी की मुश्किलें

Google News Follow

Related

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इन दिनों अपने गठन के बाद के सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना करती दिखाई दे रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने पार्टी के भीतर पहले से चल रहे असंतोष को और गहरा कर दिया है। विवाद के बाद पार्टी ने दो विधायकों को निष्कासित कर दिया, लेकिन इस कदम ने संकट को कम करने के बजाय और बढ़ा दिया है।

निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद कोलकाता में कुछ अन्य विधायकों के साथ कथित रूप से एक गुप्त बैठक की। इस घटनाक्रम ने पार्टी में संभावित टूट की चर्चाओं को और हवा दे दी है।

विवाद की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष पद के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय के समर्थन में भेजे गए प्रस्ताव से जुड़ी है। चुनाव परिणाम घोषित होने के दो दिन बाद 6 मई को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने कोलकाता स्थित आवास पर पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे कथित तौर पर उपस्थित विधायकों ने समर्थन दिया।

9 मई को तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर बताया कि पार्टी के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के पक्ष में हैं। चूंकि अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, इसलिए पत्र पर उनके हस्ताक्षर थे। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने बाद में बैठक की कार्यवाही और विधायकों के हस्ताक्षर उपलब्ध कराने को कहा।

13 और 14 मई को विधायकों ने शपथ ग्रहण के बाद विधानसभा के उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद 19 मई को पार्टी ने औपचारिक प्रस्ताव पारित करने और हस्ताक्षर जुटाने के लिए एक और बैठक बुलाई, लेकिन कई विधायक इसमें शामिल नहीं हुए। बाद में पार्टी ने 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज विधानसभा को सौंप दिया।

यहीं से विवाद शुरू हुआ। विधानसभा सचिवालय ने पाया कि कई हस्ताक्षरों का प्रारूप अलग था। कुछ हस्ताक्षर बड़े अक्षरों (कैपिटल लेटर्स) में थे, जबकि कुछ केवल शुरुआती अक्षरों तक सीमित थे। जब इन हस्ताक्षरों की तुलना उपस्थिति रजिस्टर से की गई तो लगभग 20 हस्ताक्षरों में कथित तौर पर मेल नहीं पाया गया। इसके बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से जालसाजी का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

27 मई को विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने दावा किया कि उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए हैं। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया। जांच अब CID को सौंप दी गई है और रिपोर्टों के अनुसार जांच एजेंसी ने मामले में अभिषेक बनर्जी पर भी ध्यान केंद्रित किया है तथा उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजा गया है।

इस मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी टीएमसी पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने अपने ही विधायकों के साथ धोखाधड़ी की है। सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया, “CID ने उन 14 विधायकों में से 13 से बातचीत की जिनके हस्ताक्षर ब्लॉक लेटर्स में थे। इनमें से तीन विधायकों ने कैमरे पर स्वीकार किया कि उन्होंने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।”

विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। हालांकि पार्टी ने निष्कासन का स्पष्ट कारण नहीं बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दोनों विधायक पार्टी के भीतर कथित एंटी-अभिषेक गुट को संगठित करने की कोशिश कर रहे थे।

निष्कासन के कुछ घंटों बाद दोनों नेताओं ने कथित तौर पर कोलकाता के विधायक छात्रावास में कुछ अन्य विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठक में पश्चिम मिदनापुर की एक महिला विधायक के शामिल होने की भी चर्चा है।

दौरान ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई एक अहम बैठक में 80 में से करीब 60 टीएमसी विधायक नहीं पहुंचे। यह बैठक अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी पर हो रहे हमलों के बाद बुलाई गई थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। इसी बीच निलंबित टीएमसी नेता रिजु दत्ता ने दावा किया कि लगभग 50 विधायक एक होटल में मिले और वे खुद को असली तृणमूल के रूप में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी समूह को दल-बदल विरोधी कानून से बचना है तो उसे टीएमसी के 80 विधायकों में से कम से कम दो-तिहाई यानी लगभग 53 विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।

फिलहाल पार्टी का पुराना नेतृत्व ममता बनर्जी के साथ खड़ा दिखाई देता है, लेकिन फर्जी हस्ताक्षर विवाद, विधायकों की नाराजगी और लगातार हो रही गुप्त बैठकों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह असंतोष केवल दबाव की राजनीति है या वास्तव में तृणमूल कांग्रेस किसी बड़े राजनीतिक विभाजन की ओर बढ़ रही है।

यह भी पढ़ें:

‘तुम बिलकुल पागल हो’ लेबनान में बढ़ते संघर्ष पर ट्रंप की नेतन्याहू से नाराजी

बंगाल की खाड़ी में 4.6 तीव्रता का भूकंप, 10 किलोमीटर गहराई में दर्ज हुए झटके

केरल में मानसून का आगमन टला! क्या है नया अनुमान?

पीठ-गर्दन में अकड़न और गड़बड़ रहता है पेट? ‘सरलमत्स्यासन’ से मिलेगी राहत!  

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,460फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
310,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें