दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार वाले वेनेजुएला की कार्यकारी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के जल्द भारत दौरे पर आने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस संभावित यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना और वेनेजुएला के कच्चे तेल की बिक्री बढ़ाने के अवसर तलाशना है। हालांकि अभी तक भारत सरकार और वेनेजुएला की ओर से इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
भारत पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। हाल के महीनों में भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों को नई गति मिली है।
जानकारी के अनुसार, डेल्सी रोड्रिगेज पहले जून के पहले सप्ताह में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आने वाली थीं, लेकिन अफ्रीका में इबोला वायरस के प्रकोप के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया। इसके बावजूद उनके भारत आने की संभावना बरकरार बताई जा रही है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी पिछले महीने संकेत दिया था कि रोड्रिगेज भारत का दौरा कर सकती हैं। उन्होंने कहा था कि भारत के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं और वेनेजुएला का तेल भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने नई दिल्ली को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश के लिए प्रेरित किया है। इसी कारण वेनेजुएला का महत्व बढ़ा है।
वेनेजुएला कभी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते व्यापार प्रभावित हुआ। अब हालात बदलने के बाद भारतीय रिफाइनरियां फिर से वेनेजुएला का तेल खरीद रही हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत वेनेजुएला के सबसे बड़े ग्राहकों में शामिल हो गया है और मई 2026 में वेनेजुएला के तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी उल्लेखनीय रही।
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, लेकिन इसके बावजूद देश को तेल उत्पादन और निर्यात में कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वहां का अधिकांश कच्चा तेल अत्यधिक भारी और गाढ़ा (हेवी क्रूड) माना जाता है। इस कारण उसे निकालना, पाइपलाइन के जरिए भेजना और टैंकरों में लोड करना अपेक्षाकृत कठिन और महंगा होता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि वेनेजुएला के कच्चे तेल को उपयोग योग्य बनाने के लिए उसे नेफ्था जैसे हल्के हाइड्रोकार्बन के साथ मिलाना पड़ता है। यही वजह है कि तेल समृद्ध होने के बावजूद वेनेजुएला को उत्पादन प्रक्रिया के लिए कुछ पेट्रोलियम उत्पादों का आयात भी करना पड़ता है।
भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का इतिहास पुराना रहा है। भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां 2008 से वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी PDVSA के साथ विभिन्न परियोजनाओं में जुड़ी रही हैं। ऐसे में डेल्सी रोड्रिगेज का संभावित दौरा दोनों देशों के बीच तेल व्यापार, निवेश और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े नए समझौतों का रास्ता खोल सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह यात्रा होती है तो यह हाल के वर्षों में भारत और वेनेजुएला के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय संपर्कों में से एक होगी। इससे न केवल भारत को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प मिल सकते हैं, बल्कि वेनेजुएला को भी अपने विशाल तेल भंडार के लिए एक स्थिर और बड़ा बाजार प्राप्त हो सकता है।
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