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Thursday, October 29, 2026
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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में ‘सेक्शन 301’ अटकाव का सबसे बड़ा मुद्दा

व्यापार समझौते के अंतिम चरण में पहुंची बातचीत, भारत चाहता है भविष्य में अमेरिकी शुल्कों से मिले संरक्षण

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भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में नई दिल्ली में मंगलवार(2 जून) से एक नई दौर की वार्ता शुरू हो गई है। हालांकि बाजार पहुंच, शुल्क कटौती और निवेश जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन इस बार बातचीत में अटकाव का सबसे अहम विषय अमेरिकी व्यापार कानून का “सेक्शन 301” बनकर उभरा है।

भारत की चिंता यह है कि यदि आज व्यापार समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को कम शुल्क का लाभ मिलता है, लेकिन भविष्य में अमेरिका सेक्शन 301 के तहत नए टैरिफ लगा देता है, तो समझौते से मिलने वाले फायदे काफी हद तक समाप्त हो सकते हैं। यही वजह है कि भारतीय वार्ताकार इस समझौते को अंतिम रूप देने से पहले टैरिफ स्थिरता और सुरक्षा का आश्वासन मांग रहे हैं।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर लगभग 99 प्रतिशत चर्चा पूरी हो चुकी है। ऐसे में मौजूदा वार्ता को निर्णायक माना जा रहा है।

क्या है अमेरिका का सेक्शन 301?

सेक्शन 301 अमेरिका के 1974 के ट्रेड एक्ट का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) को उन देशों की जांच करने का अधिकार देता है जिन पर अमेरिकी व्यवसायों के खिलाफ कथित रूप से अनुचित व्यापारिक नीतियां अपनाने का आरोप हो।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो अमेरिका संबंधित देश पर अतिरिक्त आयात शुल्क, व्यापारिक प्रतिबंध या अन्य दंडात्मक कदम उठा सकता है। यह प्रावधान बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन, बाजार पहुंच में बाधा, सरकारी सब्सिडी, श्रम अधिकारों से जुड़े मामलों और जबरन तकनीकी हस्तांतरण जैसे मुद्दों पर लागू किया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सेक्शन 301 की सबसे बड़ी ताकत यह है कि अमेरिका इसके तहत विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसी लंबी कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किए बिना एकतरफा कार्रवाई कर सकता है।

भारत क्यों चाहता है सुरक्षा?

भारत की चिंता मौजूदा जांच से ज्यादा भविष्य की अनिश्चितता को लेकर है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पारस्परिक शुल्कों (Reciprocal Tariffs) को निरस्त किए जाने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत सेक्शन 301 के तहत कई देशों के खिलाफ जांच शुरू की है।

भारतीय अधिकारियों को आशंका है कि यदि इस जांच के आधार पर भविष्य में भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं, तो प्रस्तावित व्यापार समझौते के लाभ कमजोर पड़ सकते हैं। एक भारतीय व्यापार अधिकारी के अनुसार, “भारत को टैरिफ दरों, सेक्शन 301 जांच के प्रभाव और प्रतिस्पर्धी शुल्क संरचना पर चर्चा करनी होगी।” भारत चाहता है कि समझौते में ऐसे प्रावधान शामिल हों जो भविष्य में सेक्शन 301 के तहत संभावित अमेरिकी शुल्कों से भारतीय निर्यातकों को सुरक्षा प्रदान करें।

भारतीय निर्यातकों पर क्या होगा असर?

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण निर्यात बाजारों में से एक है। भारत अमेरिका को दवाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद, कपड़ा, रसायन, रत्न एवं आभूषण तथा तकनीकी सेवाएं निर्यात करता है। यदि अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं, तो भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उनकी स्थिति कमजोर पड़ सकती है।

यही कारण है कि भारत केवल शुल्क कटौती नहीं, बल्कि दीर्घकालिक व्यापारिक स्थिरता की भी मांग कर रहा है।

प्रतिस्पर्धा केवल अमेरिका से नहीं, एशियाई देशों से भी

वार्ता का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भारत अमेरिका के साथ-साथ अपने क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों को भी ध्यान में रखकर बातचीत कर रहा है। भारत चाहता है कि उसे बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य विनिर्माण केंद्रों की तुलना में बेहतर या कम से कम प्रतिस्पर्धी टैरिफ लाभ मिले।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को प्रतिस्पर्धी शुल्क दरें मिलती हैं, तो वैश्विक कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं के विस्तार के लिए भारत को प्राथमिकता दे सकती हैं। इससे देश के विनिर्माण क्षेत्र और रोजगार सृजन को बड़ा लाभ मिलेगा।

किन क्षेत्रों पर है अमेरिकी नजर?

अमेरिकी जांच में वस्त्र एवं परिधान, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, इस्पात, पेट्रोकेमिकल्स, रसायन, निर्माण सामग्री और कुछ स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों को शामिल किया गया है। अमेरिका का दावा है कि इन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता मांग से अधिक बढ़ाई गई है और इन्हें सरकारी समर्थन प्राप्त है।

हालांकि भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

समझौते पर टिकी निगाहें

सूत्रों के अनुसार यदि अंतरिम व्यापार समझौता सफलतापूर्वक संपन्न हो जाता है, तो अमेरिका सेक्शन 301 जांच जारी रहने के बावजूद भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से परहेज कर सकता है। इससे भारतीय निर्यातकों और निवेशकों को लंबे समय की निश्चितता मिलेगी।

विश्लेषकों का मानना है कि नई दिल्ली में चल रही यह वार्ता केवल व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की वैश्विक विनिर्माण और निर्यात शक्ति बनने की रणनीति से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में सेक्शन 301 पर मिलने वाली किसी भी सहमति का असर आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की दिशा तय कर सकता है।

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